रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Khairagarh : छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के ग्राम चंदेनी से सरकारी दावों की पोल खोलती एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के शासकीय प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं का इस कदर अभाव है कि मासूम बच्चे एक अत्यंत जर्जर और असुरक्षित भवन में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। बारिश के मौसम में छत से लगातार होने वाले जल-जमाव और सीपेज के कारण हर वक्त किसी अनहोनी का डर बना रहता है, जो सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
Khairagarh तीन वर्षों से कछुआ गति से चल रहा नए भवन का निर्माण
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को एक सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक माहौल देने के लिए करीब तीन साल पहले एक नए स्कूल भवन की नींव रखी गई थी। लेकिन विभागीय उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही के चलते यह निर्माण कार्य आज तक अधर में लटका हुआ है। स्थिति यह है कि आधा-अधूरा ढांचा जस का तस खड़ा है और निर्माण स्थल पर ला कर रखी गई कीमती निर्माण सामग्री भी धीरे-धीरे गायब हो चुकी है, जिससे सरकारी धन का भी नुकसान हो रहा है।
Khairagarh पेयजल का संकट और निजी स्कूलों की ओर पलायन
स्कूल की बदहाली सिर्फ जर्जर छत तक ही सीमित नहीं है। परिसर में स्थित एकमात्र बोरवेल भी लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ा है, जिसके कारण नौनिहालों के सामने पीने के साफ पानी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। वर्तमान में इस विद्यालय में करीब 30 से 35 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। स्कूल की इस दुर्दशा और प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर अब अभिभावक भारी मन से अपने बच्चों का नाम कटवाकर उन्हें महंगे निजी स्कूलों में भेजने को मजबूर हो रहे हैं।
Khairagarh ‘स्कूल जतन योजना’ के बजट पर उठे गंभीर सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में ही खैरागढ़ जिले के लगभग 132 स्कूलों की मरम्मत और अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए 7 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया था। इस भारी बजट के बावजूद चंदेनी जैसे ग्रामीण इलाकों में जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस लटके हुए निर्माण कार्य को अविलंब पूरा किया जाए और बच्चों को बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं।

