रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
100 Years of Education in Kanker : छत्तीसगढ़ के कांकेर शहर की शैक्षणिक पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुके ‘प्रैक्टिसिंग स्कूल’ ने अपने सफर का एक स्वर्णिम अध्याय पूरा कर लिया है। वर्ष 1926 में स्थापित इस ऐतिहासिक शासकीय विद्यालय के 100 वर्ष पूर्ण होने की खुशी में जिला प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 को एक भव्य ‘शताब्दी वर्ष समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है। एक सदी की इस अनवरत यात्रा में इस संस्थान ने पीढ़ियों का भविष्य संवारने का काम किया है।
100 Years of Education in Kanker स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर बीती एक सदी
प्रैक्टिसिंग स्कूल ने अपनी स्थापना के समय से ही स्वामी विवेकानंद के उस अमर विचार को आत्मसात किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “शिक्षा वही है जो चरित्र का निर्माण करे और व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाए।” 1926 से लेकर आज तक, इस विद्यालय ने न केवल बच्चों को किताबी ज्ञान से समृद्ध किया, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों, संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीज भी बोए हैं। यही वजह है कि यह स्कूल आज भी इलाके में संस्कारों का केंद्र माना जाता है।
100 Years of Education in Kanker कांकेर का पहला सरकारी स्कूल, जिसने गढ़े कई महान व्यक्तित्व
कांकेर शहर के हृदय स्थल में स्थित यह विद्यालय जिला मुख्यालय का पहला ऐसा शासकीय स्कूल है, जो अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर शताब्दी समारोह मनाने जा रहा है। इस विद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहां से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र आज देश-प्रदेश में ऊंचे पदों पर आसीन हैं। यहां के पूर्व छात्र आज उत्कृष्ट शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर और समाज के जिम्मेदार नागरिक बनकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। यही कारण है कि इस स्कूल से हर शहरवासी का एक गहरा भावनात्मक लगाव है।
100 Years of Education in Kanker ऐतिहासिक उत्सव की तैयारियां तेज, नई पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा
इस शताब्दी वर्ष को अविस्मरणीय और ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरे कांकेर शहर में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। प्रशासन और स्कूल प्रबंधन द्वारा सांस्कृतिक, बौद्धिक और कई रचनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह आयोजन न केवल विद्यालय की पुरानी और स्वर्णिम उपलब्धियों को याद करने का जरिया बनेगा, बल्कि यह आने वाली नई पीढ़ी को भी शिक्षा के असली महत्व और इस संस्थान की गौरवशाली विरासत से रूबरू कराने का एक बेहतरीन माध्यम साबित होगा।
ये भी पढ़े: Khairagarh में दांव पर नौनिहालों का भविष्य: चंदेनी स्कूल का जर्जर भवन और अधूरा निर्माण बना बड़ी मुसीबत

