रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Conclusion of Jain Mahakumbh in Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में जैन समाज द्वारा आयोजित तीन दिवसीय भव्य ‘आचार्य पदारोहण एवं तपस्या सहस्त्रावधान महोत्सव’ का रविवार को गरिमामय समापन हो गया। इस आध्यात्मिक महासंगम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।
Conclusion of Jain Mahakumbh in Raipur संतों की चरण रज से धन्य हुई छत्तीसगढ़ की पावन धरा: मुख्यमंत्री
समापन समारोह के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह संपूर्ण छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और असीम सौभाग्य का क्षण है कि पूज्य विनयकुशल जी महाराज के आचार्य पदारोहण जैसा महान उत्सव यहाँ आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के कोने-कोने और पड़ोसी देश नेपाल से पधारे जैन संतों की चरण रज से छत्तीसगढ़ की यह भूमि पवित्र हो गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि संतों का पावन सानिध्य ही समाज को सदाचार, करुणा, सेवा और परमार्थ के मार्ग पर चलने की दिव्य प्रेरणा देता है।
Conclusion of Jain Mahakumbh in Raipur अहिंसा और मानव कल्याण की वैश्विक मिसाल है जैन दर्शन: ओम बिरला
समारोह में पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जैन धर्म की समृद्ध विरासत और इसकी विचारधरा को नमन किया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में निहित कठिन तपस्या, अहिंसा और जीव मात्र के कल्याण की भावना पूरी दुनिया को शांति का मार्ग दिखाती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में जैन समाज के अनुकरणीय योगदान की खुलकर सराहना की। तीन दिनों तक चले इस समागम में जैन संतों के सानिध्य में विशेष अनुष्ठान, प्रवचन और आध्यात्मिक साधना के कई दौर चले।
Conclusion of Jain Mahakumbh in Raipur देश-विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, जयकारों से गूंजा स्टेडियम
इस त्रिविध धार्मिक महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु रायपुर पहुंचे थे। इंडोर स्टेडियम का पूरा परिसर तीन दिनों तक भक्ति, वैराग्य और संस्कारों के अनूठे संदेश से सराबोर रहा। अंतिम दिन श्रद्धालुओं में गुरुभक्ति का विशेष उत्साह देखा गया। भव्य सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस ऐतिहासिक त्रिविध महोत्सव का समापन हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ की धरती पर अध्यात्म की एक अमिट छाप छोड़ी है।
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