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रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्‍तव

Villagers in Jamshedpur have launched a protest against the Jindal company : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां मुर्गागुट्टू पंचायत के मुर्गागुट्टू गांव में पारंपरिक माझी-परगना व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा का आयोजन किया गया। इस बैठक में जिंदल कंपनी (राखा माइंस प्रबंधन) की नीतियों के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। तेज बारिश के बावजूद ग्रामीणों का हौसला डगमगाया नहीं और उन्होंने छातों तथा पेड़ों की ओट में खड़े रहकर कंपनी की मनमानी के खिलाफ आंदोलन की हुंकार भरी।

Villagers in Jamshedpur have launched a protest against the Jindal company दूषित पानी और पर्यावरण से खिलवाड़ का आरोप

ग्रामसभा के दौरान ग्रामीणों ने राखा माइंस प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डी-वाटरिंग प्रक्रिया के तहत खदानों से निकाले जा रहे पानी को बिना किसी ट्रीटमेंट (शोधन) के सीधे स्थानीय नदी-नालों में बहाया जा रहा है। इस दूषित जल के कारण पूरे क्षेत्र का जलस्तर और पीने के पानी के स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस वजह से स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है और मवेशियों के लिए भी पानी अनुपयोगी हो गया है।

Villagers in Jamshedpur have launched a protest against the Jindal company स्थानीय युवाओं की उपेक्षा और विस्थापितों की बदहाली

बैठक में रोजगार की नीति को लेकर भी गहरा असंतोष देखा गया। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस से प्रभावित और विस्थापित होने वाले परिवारों के योग्य युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, जबकि बाहरी लोगों को बिचौलियों के माध्यम से नियुक्त किया जा रहा है। इसके साथ ही, वर्षों पहले विस्थापितों को दिए गए सरकारी आवासों की जर्जर स्थिति और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं (सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल) की भारी कमी पर भी चिंता जताई गई। कंपनी द्वारा स्थानीय रास्तों और नालों को अपनी चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) के भीतर घेरने का भी विरोध किया गया।

Villagers in Jamshedpur have launched a protest against the Jindal company महा-ग्रामसभा की तैयारी और व्यापक संघर्ष का ऐलान

युवा आंदोलनकारी अमित महतो ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के औद्योगिक विकास के लिए यहां के आदिवासियों और मूलवासियों ने अपनी उपजाऊ जमीनें और घर कुर्बान कर दिए, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ प्रदूषण, बेरोजगारी और बदहाली मिली है। उन्होंने कहा कि अब अधिकारों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जल्द ही माझी बाबा की अध्यक्षता में एक विशाल ‘महा-ग्रामसभा’ बुलाई जाएगी, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय कर प्रशासन, खनन विभाग और माइंस प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा जाएगा।

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