KochiKochi
Spread the love

रिपोर्टर: ईशु कुमार

Kochi : केरल में पिछले महीने पुलिस द्वारा भंडाफोड़ किए गए अवैध अंग व्यापार (Organ Trade Racket) मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। अंग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामलों की जांच के तहत ED ने गुरुवार सुबह केरल के कई जिलों में स्थित बड़े और मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पतालों पर एक साथ छापेमारी की। ED की कोच्चि जोनल यूनिट के अधिकारियों ने एर्नाकुलम, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और कोट्टायम जिलों के नामी अस्पतालों में पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया है।

Kochi मुख्य आरोपी के वित्तीय लेन-देन और अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत की जांच

जाँच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे अवैध कारोबार में कुछ अस्पताल कर्मियों और डॉक्टरों की भी मिलीभगत हो सकती है। ED का मुख्य फोकस इस रैकेट के मास्टरमाइंड मोहम्मद नजीब कल्लात्रा (निवासी कासरगोड) द्वारा अंग तस्करी के जरिए कमाए गए काले धन का पता लगाना है। अस्पतालों में डोनर रजिस्ट्री, ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) से जुड़े रिकॉर्ड, आंतरिक स्वीकृतियां और वित्तीय दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। साक्ष्य मिलने पर अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा सकती है।

Kochi गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर करोड़ो का खेल: ऐसे होता था फर्जीवाड़ा

केरल पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले में आपराधिक साजिश और मानव तस्करी के एंगल से जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर अंग दान करने के लिए फंसाता था। केरल के विभिन्न अस्पतालों में अब तक ऐसे कम से कम 20 संदिग्ध ट्रांसप्लांट कराए जाने की आशंका है। इस खेल में अंगों के प्राप्तकर्ताओं (Recipients) से 20 से 25 लाख रुपये वसूले जाते थे, जबकि मजबूर डोनर को सिर्फ 5 से 10 लाख रुपये ही दिए जाते थे। बाकी की मोटी रकम बिचौलिए डकार जाते थे।

Kochi कागजातों में हेरफेर: डॉक्टरों के नकली सील और नेताओं के लेटरहेड का इस्तेमाल

गिरोह के सदस्य अंग प्रत्यारोपण के लिए जरूरी कानूनी मंजूरी हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने डॉक्टरों की नकली सील, फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और अस्पतालों के लेटरहेड तक तैयार कर रखे थे। इतना ही नहीं, डोनर और मरीज के बीच फर्जी पारिवारिक संबंध साबित करने के लिए सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) के नाम वाले खाली लेटरहेड का भी गलत इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपी नजीब को गाजियाबाद (यूपी) से गिरफ्तार किया गया था, जबकि उसकी पत्नी रशीदा और कई अन्य सहयोगी भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

ये भी पढ़े: Manipur के कांगपोकपी में सुरक्षा बलों का बड़ा एक्शन: भारी मात्रा में हथियार बरामद, 30 अवैध बंकर किए ध्वस्त