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रिपोर्टर: गनेश सिंह

Sound of cleanliness in Haridwar after Somvati Amavasya : तीर्थनगरी हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के पावन स्नान पर्व के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने मिलकर एक व्यापक स्वच्छता महाअभियान की शुरुआत की है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के विशेष मार्गदर्शन में पंतद्वीप मैदान और गंगा घाटों के आसपास के समूचे क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

Sound of cleanliness in Haridwar after Somvati Amavasya महास्नान के बाद कचरा प्रबंधन के लिए एकजुट हुआ तंत्र

सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालुओं ने हरिद्वार पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। इस विशाल समागम के बाद घाटों और मेला क्षेत्रों में फैले कूड़े-कचरे को साफ करने के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम, जल संस्थान और कई स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मिलकर मोर्चा संभाला। सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से श्रमदान कर पंतद्वीप मैदान सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों से अपशिष्ट सामग्री को हटाया और पूरे क्षेत्र को पुनः व्यवस्थित किया।

Sound of cleanliness in Haridwar after Somvati Amavasya दो दिवसीय विशेष अभियान, अधिकारी खुद कर रहे हैं निगरानी

हरिद्वार की पवित्रता और वैश्विक सुंदरता को अक्षुण्ण रखना इस अभियान का मुख्य ध्येय है। अभियान के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और नगर निगम की टीमों ने विभिन्न वार्डों और घाटों का धरातलीय निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह विशेष अभियान किसी एक दिन की कवायद नहीं है। 20 जून 2026 से शुरू हुआ यह महाअभियान 21 जून 2026 तक निरंतर जारी रहेगा, ताकि स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को एक स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण मिल सके।

Sound of cleanliness in Haridwar after Somvati Amavasya साझा जिम्मेदारी: प्रशासन ने जनता से मांगी सहयोग की आहुति

प्रशासन ने इस महाअभियान के माध्यम से आम नागरिकों, स्थानीय व्यापारियों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से भी देवभूमि को स्वच्छ रखने की भावुक अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन के बाद व्यवस्थाओं को सुदृढ़ और साफ-सुथरा बनाए रखना केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की एक साझा और नैतिक जिम्मेदारी है।

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