रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Gujarat : सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य में फ्री दिव्यांग बस पास को डिजीलॉकर (DigiLocker) प्लेटफॉर्म के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत (इंटीग्रेट) कर दिया गया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब तक 4.42 लाख से अधिक डिजिटल पास जारी किए जा चुके हैं।
Gujarat डिजीलॉकर इंटीग्रेशन से खत्म हुई फिजिकल पास की झंझट
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा और विभाग के सचिव हर्षद पटेल के अनुसार, डिजीलॉकर से जुड़ने के बाद लाभार्थियों को अब हर समय कागजी पास साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पास के फटने या खो जाने का डर खत्म हो गया है। लाभार्थी अब अपने स्मार्टफोन में डिजीलॉकर के माध्यम से डिजिटल बस पास दिखाकर गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) की बसों में आसान और नि:शुल्क यात्रा कर सकते हैं।
Gujarat GSRTC बसों में नि:शुल्क यात्रा और 4 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर
यह डिजिटल बस पास केवल यात्रा की सुविधा ही प्रदान नहीं करता, बल्कि इसके साथ लाभार्थियों को 4 लाख रुपये का एक्सीडेंटल डेथ इंश्योरेंस कवर भी दिया जाता है। दुर्घटना की स्थिति में पास धारक के नॉमिनी या कानूनी वारिस आवश्यक दस्तावेज जमा करके इस बीमा राशि का दावा कर सकते हैं।
पेपरलेस गवर्नेंस और ‘डिजिटल इंडिया’ को बढ़ावा
स्टेट ई-गवर्नेंस मिशन टीम (SeMT) के सहयोग से लागू की गई यह व्यवस्था डिजिटल इंडिया और पेपरलेस गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पारदर्शी और त्वरित वेरिफिकेशन की सुविधा प्रदान करती है, जिससे दिव्यांगजनों के लिए सरकारी सुविधाओं तक पहुँच अत्यंत सरल और सुरक्षित हो गई है।

