Kalpasar ProjectKalpasar Project
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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Kalpasar Project : आमतौर पर नदियों के बहते जल को समुद्र में मिलने से रोकना बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना इस धारणा को चुनौती दे रही है। इस योजना के तहत खंभात की खाड़ी पर लगभग 60 से 64 किलोमीटर लंबी विशाल संरचना (बांध/डाइक) निर्मित कर समुद्र के एक बड़े भाग को मीठे पानी की विशाल झील में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

चार प्रमुख नदियों के व्यर्थ बहते जल का संचय

Kalpasar Project इस परियोजना की सबसे मुख्य विशेषता यह है कि यह समुद्र में जाकर व्यर्थ होने वाले नदी जल को बचाएगी। इसके माध्यम से नर्मदा, साबरमती, माही और धाधर जैसी राज्य की बड़ी नदियों के अतिरिक्त पानी को मोड़कर एक स्थान पर एकत्रित किया जाएगा, जिससे विशाल जल भंडार तैयार होगा।

7,800 MCM जल संग्रहण क्षमता और विशाल क्षेत्रफल

Kalpasar Project अनुमान के अनुसार, इस विशाल जलाशय की भण्डारण क्षमता लगभग 7,800 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) होगी। यह जलाशय लगभग 1,600 से 2,000 वर्ग किलोमीटर के व्यापक क्षेत्र में फैला होगा, जो एशिया के सबसे बड़े कृत्रिम मीठे पानी के जलाशयों में से एक साबित हो सकता है।

सौराष्ट्र में जल संकट का स्थायी समाधान और आर्थिक विकास

Kalpasar Project यह योजना विशेष रूप से पानी की कमी से जूझ रहे सौराष्ट्र अंचल के लिए वरदान साबित होगी। इससे न केवल पीने के पानी और सिंचाई सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार होगा, बल्कि कृषि, स्थानीय उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी एक नई दिशा और रफ्तार मिलेगी।

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