Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

गुजरात के पोरबंदर ऑलवेदर पोर्ट पर मालवाहक जहाज PDI 1383 हरि दर्शन में अचानक आग लग गई। जहाज में 950 टन चावल और 78 टन चीनी भरी थी। 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पोरबंदर पोर्ट पर मचा हड़कंप:
गुजरात के पोरबंदर स्थित ऑलवेदर पोर्ट पर सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हुआ। माल से भरे जहाज PDI 1383 हरि दर्शन में अचानक भीषण आग लग गई। यह जहाज सूरत से रवाना होकर सोमालिया की ओर जा रहा था। जहाज में 950 टन चावल और 78 टन चीनी लदी हुई थी, जिससे आग तेजी से फैल गई और पूरे पोर्ट क्षेत्र में अफरातफरी मच गई।

समय रहते सभी नाविक सुरक्षित:
आग लगते ही जहाज पर सवार 14 क्रू मेंबर्स की जान खतरे में पड़ गई, लेकिन राहत की बात यह रही कि रेस्क्यू टीम ने तुरंत सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया

  • नाविकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
  • किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
  • पोर्ट अधिकारियों ने तुरंत एमर्जेंसी ऑपरेशन शुरू किया, ताकि आग पोर्ट तक न पहुंचे।

जहाज को समुद्र में खींचकर बचाया गया:
आग से जहाज को बचाने और पोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे तुरंत खींचकर समुद्र के गहरे हिस्से में ले जाया गया। इस निर्णय से पोर्ट और आसपास के ढांचे को बड़ा नुकसान होने से रोका गया। हालांकि, जहाज की स्थिति गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बताई जा रही है।

आग लगने की वजह पर जांच जारी:
अधिकारियों के अनुसार, अभी तक यह साफ नहीं है कि आग किन कारणों से लगी।
संभावित कारणों की जांच की जा रही है:

  • जहाज में तकनीकी खराबी
  • इंजन रूम में शॉर्ट सर्किट
  • माल के बीच चिंगारी से लगी आग

प्राथमिक आकलन से पता चलता है कि चावल और चीनी जैसे ज्वलनशील माल ने आग को और भयावह बना दिया।

बड़ी सीख और चेतावनी:
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि भारी मालवाहक जहाजों में सुरक्षा मानकों का पालन और भी सख्ती से होना चाहिए।

  • सुरक्षा प्रशिक्षण: क्रू मेंबर्स को नियमित फायर सेफ्टी ट्रेनिंग देना जरूरी।
  • फायर फाइटिंग सिस्टम: हर जहाज पर अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम होना अनिवार्य।
  • पोर्ट की तैयारी: आपातकालीन हालात से निपटने के लिए पोर्ट पर हमेशा स्टैंडबाय टीम मौजूद रहनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण:
पोरबंदर की यह घटना भले ही बड़ी त्रासदी में नहीं बदली, लेकिन इसने साफ कर दिया है कि कार्गो शिपिंग इंडस्ट्री में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। 14 नाविकों की जान समय रहते बचा ली गई, लेकिन जहाज और करोड़ों की माल-संपत्ति का नुकसान होने की संभावना है।