Iran-US ConflictIran-US Conflict
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Iran-US Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक दरार अब एक गहरे संकट में तब्दील होती दिख रही है। हालिया घटनाक्रमों ने मध्य पूर्व (West Asia) में युद्ध की चिंगारी को फिर से हवा दे दी है। दोनों देशों के बीच बातचीत का दूसरा दौर शुरू होने से पहले ही गतिरोध पैदा हो गया है, जिसके केंद्र में ईरान की वे संपत्तियां हैं जिन्हें अमेरिका ने प्रतिबंधित कर रखा है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर देरी कर रहा है, जिससे दोनों शक्तियों के बीच भरोसे की खाई और चौड़ी हो गई है।

Iran-US Conflict ईरान की दो टूक चेतावनी: 48 घंटे और सीजफायर खत्म

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी (Abbas Araghchi) ने वाशिंगटन को कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। तेहरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर अमेरिका ने ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को मुक्त करने की दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वर्तमान में जारी संघर्ष विराम (Ceasefire) को तुरंत समाप्त माना जाएगा।

ईरानी नेतृत्व का तर्क है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का नाटक कर रहा है और दूसरी तरफ आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान की कमर तोड़ने की कोशिश कर रहा है। यह अल्टीमेटम केवल एक समयसीमा नहीं है, बल्कि एक सैन्य चेतावनी भी है जो क्षेत्र में बड़े टकराव की ओर इशारा कर रही है।

Iran-US Conflict होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था के गले की फांस

इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील और खतरनाक पहलू ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने का संकेत है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए ‘एनर्जी लाइफलाइन’ माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसकी आर्थिक नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो वह इस सामरिक जलमार्ग को बाधित कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रातों-रात बेतहाशा बढ़ोतरी होगी। इसका सीधा असर भारत जैसे विकासशील देशों से लेकर विकसित पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है।

Iran-US Conflict डोनाल्ड ट्रंप का रुख: ‘नियंत्रण हमारे हाथ में है’

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी सख्त छवि के अनुरूप इस धमकी के आगे झुकते नहीं दिख रहे हैं। ट्रंप ने एक बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर रणनीतिक रूप से अमेरिका का मजबूत नियंत्रण है और इसे खोलने या बंद रखने का फैसला अमेरिका अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर करेगा।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि ईरान समझौते की मेज पर सही नीयत से नहीं आता है, तो अमेरिका अपने बाकी बचे सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। फिलहाल, दोनों देशों के बीच की यह तनातनी पूरी दुनिया को एक अनिश्चित भविष्य की ओर ले जा रही है।

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