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Iran-US : ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बाद भी समझौता सिरे चढ़ता नहीं दिख रहा है। दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर गतिरोध बरकरार है। इस विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई संपत्तियों की सुरक्षित वापसी और भविष्य में अमेरिका द्वारा किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई न किए जाने की पुख्ता गारंटी शामिल है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का साफ कहना है कि बातचीत की सफलता पूरी तरह इस बात पर टिकी है कि अमेरिका इन शर्तों पर क्या रुख अपनाता है।

Iran-US 24 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति की वापसी और चरणबद्ध प्रस्ताव

ईरान के रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ और पूर्व उपराष्ट्रपति मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की बहाली के लिए जब्त फंड को जारी करना पहली शर्त है।

  • वैध धन का दावा: ईरान का लगभग 24 अरब डॉलर का फंड अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज है, जिसे ईरान अपना वैध अधिकार मानता है।
  • चरणबद्ध समाधान का सुझाव: वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि इस फंड का एक बड़ा हिस्सा समझौते के तुरंत बाद जारी किया जाए, जबकि बाकी की रकम को आने वाले चरणों में किस्तों के रूप में मुक्त किया जा सकता है।

Iran-US होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान की दोटूक

वार्ता के दौरान ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर अपना पुराना रुख एक बार फिर दोहराया है। मोहसिन रेजाई के अनुसार, इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा और प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी ईरान और ओमान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहाँ से गुजरने वाले जहाजों से लिया जाने वाला शुल्क कोई टैक्स (टोल) नहीं, बल्कि उस मार्ग के रखरखाव और सुरक्षा प्रबंधन की फीस है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में कोई सैन्य टकराव हुआ, तो इसका असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी।

Iran-US वार्ता में देरी के लिए अमेरिका जिम्मेदार; शीर्ष मुलाकात की संभावना नहीं

ईरानी नेतृत्व का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत की रफ्तार धीमी होने की एकमात्र वजह वाशिंगटन का टालमटोल रवैया है। रेजाई ने दावा किया कि ईरान ने हमेशा चर्चा का रास्ता खुला रखा है, इसलिए अब गेंद अमेरिका के पाले में है। वहीं, अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित मुलाकात को लेकर चल रही चर्चाओं पर रेजाई ने कोई भी सकारात्मक संकेत देने से मना कर दिया और इस विषय से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।

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