Ceasefire : मध्य-पूर्व में गहराते सैन्य संकट के बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने सोशल मीडिया के माध्यम से वैश्विक समुदाय को संदेश दिया है कि ईरान किसी भी एकतरफा समझौते के सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी पक्ष निर्धारित शर्तों का ईमानदारी से पालन नहीं करते, तब तक पूर्ण युद्धविराम की बात करना बेमानी है।

Ceasefire स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट
ईरान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कालीबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन जारी रहा, तो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुचारू रूप से खोलना संभव नहीं होगा।
चूंकि दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए ईरान का यह रुख सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए खतरे की घंटी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी समुद्री सीमाओं और आर्थिक हितों के खिलाफ होने वाली किसी भी नाकेबंदी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
Ceasefire लेबनान और क्षेत्रीय मोर्चों पर आक्रामकता का विरोध
ईरानी नेतृत्व ने क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए “जायोनिस्ट आक्रामकता” को जिम्मेदार ठहराया है। कालीबाफ के अनुसार, केवल एक मोर्चे पर शांति स्थापित करने से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने लेबनान की स्थिति का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक सभी मोर्चों पर हमलों और तनाव को पूरी तरह नहीं रोका जाता, तब तक स्थायी शांति का सपना अधूरा रहेगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय संघर्षों का व्यापक समाधान ही उसकी प्राथमिकता है।
Ceasefire दबाव की रणनीति को ईरान की दो-टूक
बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिका या उसके सहयोगियों द्वारा बनाया गया कोई भी सैन्य या आर्थिक दबाव बेअसर साबित होगा। ईरान का मानना है कि धमकियों के जरिए उसे मेज पर नहीं लाया जा सकता।
- अधिकारों की मान्यता: ईरान ने कहा कि किसी भी स्थायी समाधान के लिए उसके संप्रभु अधिकारों को मान्यता देना अनिवार्य है।
- संतुलित समझौता: ईरान केवल ऐसे व्यापक समझौते के पक्ष में है जो संतुलित हो और जिसमें सभी पक्षों की जवाबदेही तय हो।
इस बयान ने साफ कर दिया है कि मध्य-पूर्व में युद्धविराम की राह अभी चुनौतीपूर्ण है और गेंद अब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के पाले में है।
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