रिपोर्टर: गनेश सिंह
Rajouri : जम्मू-कश्मीर का राजौरी जिला इस समय भीषण गर्मी, लू (Heatwave) और लंबे समय से जारी सूखे के कारण जंगलों की आग (Wildfires) से जूझ रहा है। बुधवार को राजौरी के कई वन क्षेत्रों में एक बार फिर भीषण आग भड़क उठी, जिसने देखते ही देखते बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। वन विभाग के कर्मचारी, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण मिलकर इस बेकाबू होती आग को शांत करने के प्रयासों में जुटे हैं।
Rajouri पिछले 12 हफ्तों में आग की घटनाओं में भारी इजाफा
यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहा है। राजौरी के वन संरक्षक (पश्चिम सर्कल) सत पाल के मुताबिक, पिछले करीब 12 हफ्तों (चार महीनों) के भीतर राजौरी और नौशेरा दोनों वन प्रभागों (Divisions) को मिलाकर जंगल में आग लगने की लगभग 45 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। हाल ही में मौजूदा शुष्क मौसम के चलते कालाकोट तहसील के सियालसुई खादर वन क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया था। हालांकि, बीच में हुई हल्की बूंदाबांदी से तापमान गिरा है, जिससे आने वाले दिनों में थोड़ी राहत की उम्मीद है।
Rajouri वन्यजीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान
वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह ‘सतही आग’ (Surface Fires) है और पेड़ों के ऊपरी हिस्सों (Crown Fires) तक नहीं पहुंची है, फिर भी इसका असर बेहद विनाशकारी है। इस आग के कारण जंगलों की वनस्पतियों (बायोमास) के साथ-साथ वहाँ रहने वाले पक्षियों, सरीसृपों (Reptiles) और छोटे वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुँच रहा है। आग के शुरुआती फैलाव को रोकने और तुरंत मदद पहुँचाने के लिए वन विभाग, वन सुरक्षा बल, सामाजिक वानिकी विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमों को मुस्तैद किया गया है।
Rajouri अधिकारियों ने की जनता से सहयोग की अपील
वन विभाग ने इस प्राकृतिक आपदा से निपटने और वनों को बचाने के लिए एक साझा बैठक की है, जिसमें त्वरित संचार और संसाधनों को जुटाने पर चर्चा हुई। वन अधिकारी सत पाल ने स्थानीय निवासियों से अपील करते हुए कहा:
“जंगलों को आग से सुरक्षित रखने के लिए आम जनता का सहयोग बेहद जरूरी है। लोग किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और पूरी सावधानी रखें। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपनी इस अमूल्य हरित संपदा और वन्यजीवों की रक्षा करें।”

