Dhumavati Jayanti 2026Dhumavati Jayanti 2026
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Dhumavati Jayanti 2026 : आज 22 जून 2026 को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के अवसर पर धूमावती जयंती मनाई जा रही है। देवी धूमावती को दस महाविद्याओं में एक विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका यह स्वरूप जीवन की बाधाओं, रोगों और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाला माना जाता है। हालांकि, देवी के इस रूप की पूजा को लेकर एक विशेष परंपरा भी प्रचलित है, जिसके अनुसार विवाहित महिलाएं उनकी आराधना नहीं करतीं। आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा और इस स्वरूप का महत्व।

Dhumavati Jayanti 2026 माता धूमावती बनने की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार माता पार्वती को अत्यधिक भूख लगी। उस समय कैलाश पर्वत पर भोजन उपलब्ध नहीं था। उन्होंने भगवान शिव से भोजन की व्यवस्था करने का आग्रह किया, लेकिन शिवजी गहन समाधि में लीन थे।

काफी समय तक प्रतीक्षा करने के बाद भी जब भोजन नहीं मिला, तो भूख से व्याकुल होकर माता पार्वती ने भगवान शिव को ही अपने भीतर समाहित कर लिया। भगवान शिव के कंठ में स्थित विष के प्रभाव से माता पार्वती के शरीर से धुआं निकलने लगा और उनका स्वरूप अत्यंत विकराल एवं धूम्रयुक्त हो गया।

इसके बाद भगवान शिव ने प्रकट होकर कहा कि धुएं से आच्छादित इस रूप के कारण अब तुम्हें धूमावती के नाम से जाना जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इस स्वरूप में तुम विधवा के रूप में पूजी जाओगी। यही कारण है कि धार्मिक परंपराओं में सुहागिन महिलाओं द्वारा इस स्वरूप की पूजा नहीं की जाती।

Dhumavati Jayanti 2026 क्यों नहीं करतीं सुहागिन महिलाएं पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी धूमावती का स्वरूप वैराग्य, त्याग और विधवा रूप का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण विवाहित महिलाओं को इस स्वरूप की पूजा से दूर रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह मान्यता परंपरागत धार्मिक विश्वासों पर आधारित है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी मान्यताओं में भिन्नता भी देखने को मिलती है।

Dhumavati Jayanti 2026 धूमावती माता की पूजा का धार्मिक महत्व

जीवन की बाधाओं से मिलती है मुक्ति: मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक देवी धूमावती की पूजा करने से जीवन में आने वाली अनेक परेशानियां और बाधाएं दूर होती हैं।

ग्रह दोषों के प्रभाव में कमी: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवी की आराधना से कुंडली में मौजूद कुछ दोषों के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं।

आत्मबल और धैर्य में होती है वृद्धि: धूमावती माता की उपासना व्यक्ति को मानसिक मजबूती, धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है।

केतु ग्रह से जुड़े दोषों में राहत: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी धूमावती का संबंध केतु ग्रह से माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा करने से केतु से संबंधित बाधाओं और समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।

धूमावती माता का स्वरूप शक्ति, वैराग्य और कठिन परिस्थितियों में आत्मबल का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से जुड़ी परंपराएं प्राचीन धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की गई आराधना को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक दृढ़ता प्रदान करने वाला माना जाता है।

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