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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Bhind : मध्य प्रदेश के भिंड जिले की बरोही थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने वाहन चोरी और धोखाधड़ी करने वाले एक बेहद शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में तीन शातिर आरोपियों को धर दबोचा है, जिनमें से एक वकालत (Law) का छात्र है और दूसरा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। आरोपियों के कब्जे से एक चुराई गई वैगनआर कार, 30 हजार रुपये नकद और फर्जी रजिस्ट्रेशन कार्ड बरामद किए गए हैं।

Bhind ऐसे हुआ ठगी और चोरी के अनोखे खेल का खुलासा

मामले की शुरुआत 21 जुलाई 2026 को हुई, जब बरोही निवासी पवन भदौरिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने अपनी बेटी की बीमारी का बहाना बनाकर तत्काल पैसे की जरूरत बताई और उनसे वैगनआर कार का सौदा 4 लाख रुपये में तय किया। फरियादी ने 1.68 लाख रुपये देकर ई-स्टाम्प पर एग्रीमेंट कराया, जबकि बाकी रकम बाद में देना तय हुआ था। आरोपी ने गाड़ी का रजिस्ट्रेशन और आधार कार्ड सौंप दिया। हालांकि, 26 जुलाई की रात पीड़ित के घर के बाहर खड़ी वह कार अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई।

Bhind GPS से ट्रैक कर दोबारा चुरा लेते थे बेची हुई गाड़ी

मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस और साइबर सेल को चौंकाने वाले सुराग मिले। जांच में पता चला कि यह गिरोह सबसे पहले किसी एजेंसी या व्यक्ति से किराए (Rent) पर लग्जरी या चार पहिया वाहन लेता था। इसके बाद गाड़ी में जीपीएस ट्रैकर (GPS Tracker) लगा देते थे। फिर फर्जी आधार और रजिस्ट्रेशन कार्ड तैयार कर किसी निर्दोष व्यक्ति को मजबूरी का हवाला देकर गाड़ी बेच देते थे।

गाड़ी बेचने के कुछ ही दिनों बाद आरोपी जीपीएस लोकेशन ट्रैक कर उस गाड़ी को फिर से चुरा लेते थे और उसे असली मालिक को किराए के पैसों के साथ वापस सौंप देते थे। इस तरह वे बिना किसी को शक हुए लाखों की ठगी को अंजाम दे रहे थे।

3 आरोपी सलाखों के पीछे, 2 अन्य साथियों की तलाश जारी

पुलिस ने मुखबिर और तकनीकी सर्विलांस की मदद से कार्रवाई करते हुए मयंक राठौर व प्रशांत राठौर (निवासी गदईपुरा, ग्वालियर) और धर्मेंद्र रावत (निवासी गोहद, भिंड) को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में गिरोह ने बीटीआई रोड भिंड से भी इसी तरह एक कार चुराने की बात स्वीकार की है।

भिंड पुलिस के अनुसार, गिरोह के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि बचे हुए आरोपियों की धरपकड़ के बाद वाहन धोखाधड़ी के कई और बड़े मामलों का पर्दाफाश हो सकता है।

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