रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara : डिजिटल भुगतान के माध्यम UPI पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के प्रस्ताव पर व्यापारियों का विरोध शुरू हो गया है। जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने इस फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस कदम से न केवल छोटे व मध्यम कारोबारियों पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा, बल्कि कैशलेस भारत के अभियान को भी झटका लग सकता है।
छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं कारोबारी
Jamtara संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भारत में डिजिटल क्रांति को सफल बनाने में UPI की निःशुल्क और आसान सेवा की सबसे बड़ी भूमिका रही है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारी तक इससे सहजता से जुड़े हैं। यदि अब इस पर शुल्क थोपा जाता है, तो व्यापारियों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। इसके चलते कई कारोबारी मजबूरी में दोबारा कैश-आधारित (नकद) लेनदेन की ओर रुख कर सकते हैं।
उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर और प्रभावित होगी कैशलेस अर्थव्यवस्था
Jamtara चैंबर ऑफ कॉमर्स का मानना है कि मर्चेंट शुल्क लागू होने से कारोबारियों का जो अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा, उसका अप्रत्यक्ष असर अंततः आम उपभोक्ताओं की जेब पर ही पड़ेगा। जब व्यापारी अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई वस्तुओं व सेवाओं की दरों में करेंगे, तो महंगाई पर भी असर दिखेगा। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने की पूरी आशंका है।
MDR वापस लेने की मांग, फैसला न बदले जाने पर आंदोलन की चेतावनी
Jamtara जामताड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने सरकार और संबंधित बैंकिंग निकायों से इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की अपील की है। अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि UPI को सुलभ और कम लागत वाला माध्यम बनाए रखने का निर्णय नहीं लिया गया, तो व्यापारी संगठन एकजुट होकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए विवश होंगे।

