रिपोर्टर: प्रेम कुमार श्रीवास्तव
Jamshedpur : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी गई है। इस बड़े फैसले के बाद से ही पूरे मिथिला समाज और मैथिली भाषियों में हर्ष और उल्लास का माहौल है। जमशेदपुर के वरिष्ठ समाजसेवी और मिथिला सांस्कृतिक परिषद के आजीवन सदस्य प्रमोद मिश्रा ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विशेष आभार प्रकट किया है।
Jamshedpur मातृभाषा में शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा
इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया गया कि सीबीएसई (CBSE) के सिलेबस में मैथिली को स्थान मिलने से नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह कदम न केवल मैथिली भाषा के संरक्षण और संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि इससे मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी।
Jamshedpur सांसद गोपाल जी ठाकुर के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने के पीछे जनप्रतिनिधियों के लंबे संघर्ष और प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है। समाजसेवी प्रमोद मिश्रा ने दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर के निरंतर प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मैथिली को उसका जायज हक दिलाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जिसे सांसद महोदय ने पुरजोर तरीके से सही मंच पर उठाया और इसे तार्किक परिणति तक पहुंचाया।
Jamshedpur मैथिली भाषियों के लिए उज्ज्वल भविष्य के रास्ते खुले
विशेषज्ञों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि स्कूली स्तर पर मैथिली को मान्यता मिलने से भाषा का भविष्य सुरक्षित हुआ है। अब छात्र अकादमिक रूप से इस विषय को चुन सकेंगे, जिससे न केवल रोजगार और शोध (Research) के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि देश-विदेश में फैली मिथिला की अनूठी कला, साहित्य और संस्कृति का तेजी से प्रचार-प्रसार भी संभव हो सकेगा।

