उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की ३८ इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई के नोटिस के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने इस पूरे मामले को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में हुए चढ़ावे की कथित चोरी से जनता का ध्यान भटकाने के लिए प्रशासन द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा नए सिरे से हवा दी जा रही है।
“हिंदू-मुस्लिम दोनों मिलकर बचाएंगे जौहर यूनिवर्सिटी”: सांसद नदवी
मीडिया से बातचीत में सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने यूनिवर्सिटी को ढहाने के नोटिस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा:
- बच्चों का भविष्य: “जौहर यूनिवर्सिटी केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हजारों बच्चों का भविष्य है। यहाँ बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों और धर्मों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।”
- एकजुटता का दावा: सांसद ने दावा किया कि वह इस मुद्दे को लेकर रामपुर की जनता के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दोनों मिलकर इस शिक्षा के मंदिर को बचाने के लिए आगे आएंगे और इसे किसी भी हाल में नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
क्या है ३८ इमारतों को गिराने के आदेश का पूरा मामला?
दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने हाल ही में सपा नेता आजम खान द्वारा स्थापित इस यूनिवर्सिटी की ३८ इमारतों को ध्वस्त करने का कड़ा नोटिस जारी किया है।
- अवैध निर्माण का आरोप: प्राधिकरण की जांच में पाया गया कि इन ३८ इमारतों का निर्माण बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान (नक्शा पास कराए) के किया गया था।
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी: आरडीए के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर में फायर सेफ्टी (अग्निशमन सुरक्षा) के मानकों की अनदेखी की गई है, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में वहाँ पढ़ने वाले छात्रों और कर्मचारियों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
- १५ दिनों की मोहलत: उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत जारी इस नोटिस में प्रबंधन को १५ दिनों के भीतर इन अवैध निर्माणों को खुद हटाने के निर्देश दिए गए हैं, ऐसा न करने पर प्रशासन खुद इन्हें ध्वस्त करने की कानूनी कार्रवाई करेगा।
कानूनी विवादों में घिरी रही है जौहर यूनिवर्सिटी
यह पहला मौका नहीं है जब मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी विवादों के केंद्र में आई हो। पिछले कुछ वर्षों में यह परिसर जमीन कब्जाने, सरकारी पट्टे (लीज़) के नियमों के उल्लंघन और कई अन्य कानूनी मुकदमों का सामना कर रहा है।
- गवर्निंग ट्रस्ट से इस्तीफा: उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही यूनिवर्सिटी के एक बड़े हिस्से को अपने कब्जे में ले चुकी है।
- प्रबंधन में बदलाव: इसी साल की शुरुआत में यूनिवर्सिटी का संचालन करने वाले ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट’ के आजीवन अध्यक्ष व चांसलर आजम खान और उनके परिवार ने औपचारिक रूप से ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार यूपी सरकार को घेरने में जुटी हैं।
