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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले अपने भाई व वरिष्ठ नेता अजित पवार को याद कर बेहद भावुक हो गईं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मीडिया से बातचीत के दौरान सुप्रिया सुले ने अजित पवार के निधन के बाद परिवार के हालातों और दोनों एनसीपी गुटों के एकीकरण की कोशिशों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि उनके भाई की आखिरी इच्छा दोनों गुटों को एक करने की थी, लेकिन दूसरे पक्ष के अड़ियल रुख के कारण अब इस अध्याय पर हमेशा के लिए पूर्ण विराम लग चुका है।

“धीरे-धीरे दुख से उबर रहा है परिवार, दादा की अंतिम इच्छा थी दोनों गुटों का एक होना”

सुप्रिया सुले ने नम आंखों से अपने भाई को याद करते हुए कहा कि अजित पवार को हमसे बिछड़े पांच महीने बीत चुके हैं और उनका परिवार अब धीरे-धीरे इस असहनीय दुख से उबरने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पहली बार दोनों गुटों के विलय को लेकर एक बड़ा खुलासा किया।

“दादा की अंतिम और सबसे बड़ी इच्छा थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट फिर से एक हो जाएं। वह चाहते थे कि दोनों पक्ष आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ आएं और मिलकर राज्य व देश की सेवा करें। हम उनकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान करने और इसे पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।”

“दूसरे पक्ष की ओर से नहीं दिखी कोई सकारात्मकता, जताया दुख”

सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि अजित पवार के जीवित रहते हुए भी उनका परिवार और संगठन यही चाहता था कि दोनों धड़े एक हों, और उनके जाने के बाद भी उनकी यही भावना थी। लेकिन दूसरे पक्ष का रवैया बेहद निराशाजनक रहा।

  • दावे को नकारा: सुप्रिया ने कहा कि जिस दिन अजित दादा का निधन हुआ, उसी दिन हमारे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस विलय के विषय को सामने रखा था। लेकिन सामने वाले पक्ष ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सीधे तौर पर ऐसी किसी भी बात या इच्छा के होने से ही साफ इनकार कर दिया।
  • पीड़ादायक रुख: उन्होंने कहा कि इस रवैये से उन्हें और उनके परिवार को गहरी ठेस पहुंची। एक तरफ उन्होंने अपना भाई खोया था और दूसरी तरफ वे उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने की कोशिश कर रहे थे, जिसे दूसरे पक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया।

“हम स्वाभिमानी लोग हैं, अब बातचीत के सारे रास्ते बंद”

अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि बताते हुए सुप्रिया सुले ने स्पष्ट कर दिया कि अब विलय की किसी भी संभावना पर पूरी तरह रोक लग चुकी है। उन्होंने कहा:

  • स्वाभिमान से समझौता नहीं: “हम स्वाभिमानी लोग हैं और अपने आत्मसम्मान के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। अजित दादा के निधन के बाद विरोधी गुट के नेताओं के बयानों से यह साफ हो गया कि उनके मन में दादा की अंतिम इच्छा के प्रति कोई सम्मान या मंशा नहीं है।”
  • विषय का अंत: सुप्रिया ने कहा कि उन्होंने उसी क्षण इस विषय को हमेशा के लिए दफन कर दिया। अब उनके संगठन और उनका पूरा ध्यान केवल और केवल जनता, राज्य तथा देश की निस्वार्थ सेवा करने पर केंद्रित है।