by-Ravindra Sikarwar
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, जिससे अब बच्चे और किशोर बैंक खाते के बिना भी यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। आरबीआई ने जुनियो पेमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआई) जारी करने की प्रारंभिक मंजूरी प्रदान की है, जो बच्चों और युवाओं के लिए एक विशेष डिजिटल वॉलेट लॉन्च करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह वॉलेट नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की यूपीआई सर्कल पहल से जुड़ा होगा, जिसके तहत माता-पिता अपने यूपीआई खाते को बच्चों से लिंक कर सकेंगे। इस सुविधा से न केवल डिजिटल लेन-देन आसान होगा, बल्कि वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा भी मिलेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बैंकिंग पहुंच सीमित है। जुनियो ने बताया कि यह ऐप पहले से ही 20 लाख से अधिक युवा उपयोगकर्ताओं के पास है, और अब यूपीआई एकीकरण के साथ यह और विस्तार करेगा।
मंजूरी का विवरण: पीपीआई और यूपीआई सर्कल का संयोजन
आरबीआई की यह मंजूरी 10 नवंबर 2025 को जारी की गई, जो डिजिटल वॉलेट को भौतिक और वर्चुअल दोनों रूपों में उपलब्ध कराएगी। वॉलेट के माध्यम से बच्चे किसी भी दुकान या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यूपीआई क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान कर सकेंगे, बिना खुद का बैंक खाता खोले। यह सुविधा एनपीसीआई की यूपीआई सर्कल पहल पर आधारित है, जो 2023 में शुरू हुई थी और परिवार के सदस्यों को प्राथमिक उपयोगकर्ता (माता-पिता) के खाते से सीमित लेन-देन की अनुमति देती है।
आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, 15 वर्ष से अधिक उम्र के नाबालिग पहले से ही संयुक्त खाते से यूपीआई का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन 15 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए यह नई व्यवस्था एक बड़ा बदलाव है। जुनियो वॉलेट में माता-पिता को लेन-देन की सीमा निर्धारित करने, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करने और फंड ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी। उदाहरण के लिए, माता-पिता ऐप के जरिए बच्चे को पॉकेट मनी भेज सकते हैं, खर्च की सीमा लगा सकते हैं (जैसे ₹500 प्रतिदिन) और हर ट्रांजेक्शन का विवरण देख सकते हैं। इससे बच्चे सुरक्षित तरीके से डिजिटल दुनिया से जुड़ेंगे, बिना किसी जोखिम के।
जुनियो ऐप की विशेषताएं: वित्तीय शिक्षा का नया माध्यम
जुनियो एक फिनटेक प्लेटफॉर्म है, जिसकी स्थापना 2021 में अंकित गेरा और शंकर नाथ ने की थी। यह खासतौर पर बच्चों और युवाओं के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वे जिम्मेदारी से धन प्रबंधन सीख सकें। आरबीआई मंजूरी के बाद, ऐप में निम्नलिखित प्रमुख फीचर्स जोड़े जाएंगे:
| विशेषता | विवरण |
| यूपीआई क्यूआर स्कैनिंग | बच्चे कहीं भी भुगतान कर सकेंगे, जैसे दुकान पर सामान खरीदना या ऑनलाइन गेम्स। |
| खर्च सीमा सेटिंग | माता-पिता दैनिक/मासिक लिमिट तय कर सकेंगे, जो अतिरिक्त खर्च रोकेगी। |
| रीयल-टाइम ट्रैकिंग | हर ट्रांजेक्शन का तुरंत अलर्ट, जिसमें स्थान और राशि शामिल। |
| बचत प्रोत्साहन | रिवॉर्ड पॉइंट्स, ब्रांड वाउचर और सेविंग गोल्स सेटिंग। |
| एनसीएमसी एकीकरण | सार्वजनिक परिवहन (बस/मेट्रो) में टैप-एंड-पे सुविधा। |
| कार्य-आधारित रिवॉर्ड्स | टास्क पूरा करने पर पॉइंट्स, जो वित्तीय अनुशासन सिखाएंगे। |
ये फीचर्स न केवल भुगतान को सरल बनाएंगे, बल्कि बच्चों को बचत, बजटिंग और सुरक्षित खरीदारी की आदतें डालेंगे। जुनियो के सह-संस्थापक अंकित गेरा ने सीएनबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा, “यह मंजूरी हमारी दृष्टि को मजबूत करती है, जहां अगली पीढ़ी न केवल खर्च करेगी, बल्कि बुद्धिमानी से धन का प्रबंधन भी सीखेगी। हम मार्गदर्शन और स्वतंत्रता का संतुलन बनाना चाहते हैं।” कंपनी अगले कुछ महीनों में इन फीचर्स को अपडेट करने की योजना बना रही है।
पृष्ठभूमि: डिजिटल भुगतान में बच्चों की भागीदारी
भारत में यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को क्रांति दी है—2025 तक 13 अरब से अधिक मासिक लेन-देन हो रहे हैं। लेकिन नाबालिगों के लिए बैंक खाते की अनिवार्यता एक बाधा थी। आरबीआई ने 2024 में ‘डेलिगेटेड पेमेंट्स’ सुविधा शुरू की, जो परिवार के सदस्यों को प्राथमिक खाते से सीमित उपयोग की अनुमति देती है, बिना अलग खाते के। जुनियो की यह पहल उसी को आगे बढ़ाती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां बैंकिंग सुविधाएं कम हैं। इससे परिवार एक ही खाते से वित्तीय जिम्मेदारियां साझा कर सकेंगे, जैसे बच्चे को स्कूल फीस या किताबें खरीदने के लिए पैसे देना।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा। एनपीसीआई के अनुसार, यूपीआई सर्कल से पहले ही लाखों युवा लाभान्वित हो चुके हैं, और जुनियो जैसे प्लेटफॉर्म इसे और व्यापक बनाएंगे। हालांकि, सुरक्षा पर जोर दिया गया है—सभी ट्रांजेक्शन एन्क्रिप्टेड होंगे, और माता-पिता को पूर्ण नियंत्रण रहेगा।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह मंजूरी डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बच्चों को प्रारंभिक उम्र से ही डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ेगी। जुनियो के 20 लाख से अधिक उपयोगकर्ता पहले से ही ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं, और यूपीआई लिंकिंग से यह संख्या दोगुनी हो सकती है। ग्रामीण परिवारों के लिए यह वरदान साबित होगा, जहां एक ही खाते से पूरे परिवार का प्रबंधन होता है। साथ ही, यह वित्तीय शिक्षा को मजबूत करेगा, क्योंकि बच्चे वास्तविक लेन-देन से सीखेंगे।
आरबीआई के इस निर्णय से फिनटेक उद्योग में उत्साह है, और अन्य कंपनियां भी इसी तरह के उत्पाद लाने की तैयारी कर रही हैं। लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे साइबर सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना। कुल मिलाकर, यह पहल भारत को डिजिटल रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक सकारात्मक योगदान है, जहां हर उम्र का व्यक्ति सुरक्षित भुगतान कर सके। जुनियो जल्द ही ऐप अपडेट जारी करेगा, और उपयोगकर्ता गूगल प्ले स्टोर से इसे डाउनलोड कर सकेंगे।
