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दतिया (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के मतों की गणना जारी है। मतगणना के शुरुआती दौर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने बढ़त हासिल की थी, लेकिन दौर आगे बढ़ने के साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बढ़त बना ली है। चुनावी रुझानों में घनश्याम सिंह लगातार आगे चल रहे हैं और बढ़त का अंतर करीब 12 हजार वोटों तक पहुंच गया है। अगर यह ट्रेंड बरकरार रहता है तो बीजेपी के लिए इस सीट पर दोबारा शिकस्त का सामना करना पड़ सकता है।

दतिया सीट पर क्यों कराना पड़ा उपचुनाव?

मध्य प्रदेश में वर्ष 2023 के अंत में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे, जिसमें दतिया सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने जीत हासिल की थी और तत्कालीन गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। हालांकि, बाद में एक पुराने मामले में सजा होने के बाद राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। इसी कारण दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति निर्मित हुई। इस बार कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को चुनाव मैदान में उतारा, वहीं बीजेपी ने भी चेहरा बदलते हुए युवा नेता आशुतोष तिवारी पर दांव खेला।

कांग्रेस के अंदरूनी कलह और आरोप-प्रत्यारोप का दौर

उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान भी सार्वजनिक रूप से सामने आई। पार्टी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी थी। निष्कासन के बाद राजेंद्र भारती ने कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि घनश्याम सिंह ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है। भारती ने यह दावा भी किया कि वह वर्ष 2028 के अगले राज्य विधानसभा चुनावों में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएंगे।

2028 के चुनाव और सियासी समीकरण पर नजर

यद्यपि दतिया उपचुनाव का परिणाम राज्य में बीजेपी सरकार के बहुमत पर कोई सीधा असर नहीं डालेगा, लेकिन यह नतीजा आगामी राजनीतिक संदेश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। 2023 के चुनाव के बाद बीजेपी ने सूबे की कमान डॉ. मोहन यादव को सौंपी थी। ऐसे में 2028 के आगामी आम चुनावों में बीजेपी के नए नेतृत्व की परीक्षा होगी, जबकि कांग्रेस 2018 की तरह राज्य में फिर से वापसी की जमीन तलाशने में जुटी है।