रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी लगवाने और मनचाहा तबादला (ट्रांसफर) कराने के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस फर्जीवाड़े के मुख्य सूत्रधार समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को प्रदेश के गृहमंत्री का निज सहायक (PA) बताकर मंत्रालय में अपनी गहरी पहुंच का दावा करते थे और भोले-भाले युवाओं व कर्मचारियों को अपनी ठगी का शिकार बनाते थे।
फर्जी आईकार्ड और नियुक्ति पत्रों से जमाते थे रौब
Raipur गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आदित्य मोहन पण्डा (कमल विहार निवासी) और संतराम यादव (देवपुरी निवासी) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी आदित्य खुद को गृहमंत्री का पीए बताकर रौब जमाता था। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी फर्जी पहचान पत्र (ID Card) और जाली नियुक्ति पत्र दिखाते थे। वे दावा करते थे कि इससे पहले भी कई लोगों को पुलिस, शिक्षा और गृह विभाग में नौकरी दिला चुके हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।
70 हजार रुपये ऐंठने पर पीड़ित ने खोला राज
Raipur इस पूरे मामले का भंडाफोड़ बोस्टो तांडी नामक पीड़ित की शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपियों ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 70 हजार रुपये ऐंठ लिए थे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब न तो नौकरी मिली और न ही पैसे वापस हुए, तब पीड़ित ने पुलिस की शरण ली। पुलिस ने शिकायत मिलते ही घेराबंदी कर दोनों शातिरों को दबोच लिया।
15 लोगों से 25 लाख की उगाही, पुलिस की सामने आने की अपील
Raipur पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपियों ने केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि करीब 15 लोगों को अपना शिकार बनाया था। आरोपियों ने बेरोजगार युवाओं से नौकरी के नाम पर, संविदा कर्मचारियों से नियमितीकरण के नाम पर और सरकारी कर्मचारियों से पसंदीदा स्थान पर ट्रांसफर के नाम पर लगभग 25 लाख रुपये वसूले थे। पुलिस का अनुमान है कि ठगी का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। सिविल लाइन पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि नौकरी या ट्रांसफर के नाम पर किसी भी बिचौलिए को पैसे न दें और यदि कोई इस गिरोह का शिकार हुआ है तो तत्काल थाने में शिकायत दर्ज कराए।

