Pahalgam : जम्मू-कश्मीर के शांत और सुंदर पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की पहली बरसी पर पूरा देश भावुक है। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि दी और आतंकवाद के विरुद्ध भारत के अटूट संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की प्रगति और शांति में बाधा डालने वाली कोई भी ताकत अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होगी।
Pahalgam प्रधानमंत्री का भावुक संदेश और राष्ट्र का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष पहलगाम में जो हुआ, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “हम उन निर्दोष लोगों के बलिदान को याद करते हैं जिन्होंने इस हिंसा में अपनी जान गंवाई। भारत आतंकवाद के हर स्वरूप के खिलाफ मजबूती से खड़ा है और हम अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे।”
प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सीमा पार से संचालित होने वाली आतंकी गतिविधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी भी थी। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
Pahalgam ‘ऑपरेशन महादेव’: भारतीय सेना का करारा जवाब
इस बरसी के मौके पर भारतीय सेना ने भी अपने पराक्रम को याद किया। हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हमले के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाना था। सेना ने जानकारी साझा की कि इस विशेष ऑपरेशन के तहत हमले में शामिल सभी आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया गया।
भारतीय सेना ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत की धरती पर खून बहाने वालों को कहीं भी छिपने की जगह नहीं मिलेगी। ‘ऑपरेशन महादेव’ भारतीय जांबाज सैनिकों की तत्परता और खुफिया तंत्र की मजबूती का प्रतीक बनकर उभरा है, जिसने आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ दी।
Pahalgam हमले की पृष्ठभूमि और भविष्य की सुरक्षा नीति
पिछले साल पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने मानवता को शर्मसार करते हुए पर्यटकों को निशाना बनाया था। निर्दोष लोगों की पहचान पूछकर उन पर गोलियां चलाई गई थीं, जिससे पूरा देश स्तब्ध रह गया था। हालांकि, इस दुखद घटना के बाद भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और अधिक आक्रामक हुई है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हमले के बाद की गई त्वरित कार्रवाई और सीमा पार आतंकी ठिकानों पर बढ़ते दबाव ने आतंकियों के मनोबल को पस्त किया है। अब सरकार और सेना मिलकर न केवल आतंकियों को खत्म कर रहे हैं, बल्कि उनके स्थानीय मददगारों (Over Ground Workers) के नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटे हैं ताकि घाटी में पर्यटन और शांति का माहौल बना रहे।
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