रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Saidulajab building accident : दिल्ली के साकेत स्थित सैदुलाजाब इलाके में एक अवैध पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट द्वारा नियुक्त न्याय मित्र (Amicus Curiae) की स्टेटस रिपोर्ट पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांडुरकर की पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इस पर फिलहाल कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। गौरतलब है कि 30 मई को हुए इस भीषण हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 14 अन्य घायल हुए थे।
Saidulajab building accident एमसीडी की भूमिका पर सवाल और स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग
न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने मांग की कि नगर निगम (MCD) को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया जाए कि इस अवैध निर्माण को लगातार कैसे होने दिया गया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में दिल्ली भर में बिना अनुमति के बनी ऐसी इमारतों का ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ (ढांचागत सुरक्षा जांच) कराने और अवैध निर्माणों को तुरंत सील व ध्वस्त करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया था।
यह मामला दरअसल 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश भर में आवासीय परिसरों के व्यावसायिक उपयोग और भवन नियमों के उल्लंघन की जांच के आदेश के बाद शुरू हुई कार्यवाही से जुड़ा हुआ है, जिसमें सिन्हा को अदालत की सहायता के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया गया था।
Saidulajab building accident ‘अधिकारियों की मिलीभगत’ और नियमों की अनदेखी का आरोप
स्टेटस रिपोर्ट में वकील गोविंद जी के माध्यम से आरोप लगाया गया कि नगर निगम के रिकॉर्ड में खुद इस संपत्ति पर अवैध निर्माण का एक लंबा इतिहास दर्ज है, फिर भी अधिकारियों ने इस पर आंखें मूंद रखी थीं। न्याय मित्र के अनुसार, इस इमारत को मूल रूप से केवल बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के लिए मंजूरी मिली थी। लेकिन साल 2015 में इस पर अवैध रूप से दूसरी और तीसरी मंजिल तान दी गई, और बाद में चौथी व पांचवीं मंजिल भी बना दी गई, जिसके कारण आखिरकार यह पूरी इमारत ढह गई।
रिपोर्ट में कहा गया कि नियमों के इस घोर उल्लंघन के कारण निर्दोष छात्रों और स्थानीय निवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि अवैध निर्माण से मुनाफा कमाने वाले और अपनी जिम्मेदारी न निभाने वाले अधिकारी अब भी बचे हुए हैं।
Saidulajab building accident इंजीनियरों का निलंबन महज दिखावा; ‘सिस्टम के साथ धोखाधड़ी’
अधिवक्ता सिन्हा ने तर्क दिया कि हादसे के बाद एमसीडी द्वारा दो इंजीनियरों को निलंबित करना महज एक ‘दिखावा’ और औपचारिकता है। उन्होंने अदालत से दिल्ली सरकार को भी यह निर्देश देने की मांग की कि वह मृतकों के परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे का पूरा ब्यौरा पेश करे।
इससे पहले 25 मार्च के अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि मास्टर प्लान का हवाला देकर आवासीय संपत्तियों का व्यावसायिक इस्तेमाल करना ‘सिस्टम के साथ धोखाधड़ी’ है। अदालत ने तब भी यह अंदेशा जताया था कि इस तरह के मामलों में नागरिक निकायों के अधिकारियों की उल्लंघनकर्ताओं के साथ गुप्त मिलीभगत हो सकती है, जिसकी वजह से नियमों को ताक पर रखकर ऐसी बहुमंजिला अवैध इमारतें खड़ी हो जाती हैं।
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