Kollakkayil Devaki AmmaKollakkayil Devaki Amma
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रिपोर्टर: ईशु कुमार

Kollakkayil Devaki Amma : केरल के अलापुझा जिले की रहने वाली 92 वर्षीय कोल्लामकायिल देवकी अम्मा जी (Kollakkayil Devaki Amma G) को पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाजा गया है। बिना किसी सरकारी फंडिंग या बड़े वैज्ञानिक प्रशिक्षण के, उन्होंने अकेले दम पर प्रकृति के प्रति अपने गहरे जुड़ाव से पर्यावरण परिवर्तन की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। आज उन्हें पूरा देश आदर से ‘फॉरेस्ट मदर’ और ‘वनमुत्तशी’ (जंगलों की दादी) के नाम से बुला रहा है।

Kollakkayil Devaki Amma एक हादसे से बदली जिंदगी की राह

देवकी अम्मा का शुरुआती जीवन केरल के आम ग्रामीण परिवारों जैसा ही था, जहां वे धान की खेती और कृषि कार्यों से जुड़ी हुई थीं। लेकिन 1980 के दशक में एक गंभीर कार दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। पैर में आई गंभीर चोट के कारण डॉक्टरों ने उन्हें खेतों में भारी काम करने से मना कर दिया। शारीरिक अक्षमता के उस दौर में उन्होंने हार मानने के बजाय अपने घर के आसपास की खाली पड़ी बंजर और रेतीली जमीन पर पौधे लगाना शुरू किया। जो काम एक शौक के रूप में शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे उनके जीवन का सबसे बड़ा मिशन बन गया।

Kollakkayil Devaki Amma ‘कोल्लाकल तपोवनम’ का निर्माण और जैव विविधता

पिछले चार दशकों से अधिक समय की निरंतर साधना से देवकी अम्मा ने अपनी 5 एकड़ पैतृक भूमि को एक घने मानवनिर्मित जंगल में तब्दील कर दिया है, जिसे ‘कोल्लाकल तपोवनम’ कहा जाता है।

  • 3,000 से अधिक पेड़-पौधे: इस जंगल में महोगनी, चंदन, सागौन, इमली और आम जैसे पारंपरिक पेड़ों के साथ-साथ दुर्लभ औषधीय पौधे और वनस्पतियां मौजूद हैं।
  • प्राकृतिक पर्यावरण तंत्र: इस घने जंगल में अब मोर, उल्लू, बंदर और कई प्रवासी पक्षियों जैसे जीवों ने अपना ठिकाना बना लिया है।
  • पारंपरिक तकनीक का उपयोग: देवकी अम्मा ने इस जंगल को सींचने के लिए किसी आधुनिक तकनीक का नहीं, बल्कि पारंपरिक खाद, मवेशियों (गाय-भैंस) के सहयोग और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) जैसी विशुद्ध जैविक प्रणालियों का उपयोग किया है।

Kollakkayil Devaki Amma गुमनाम नायकों को सम्मान और वैश्विक संदेश

भारत सरकार द्वारा उन्हें ‘अनसंग हीरोज’ (गुमनाम नायकों) की श्रेणी में पद्म श्री देकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले पर्यावरण योद्धाओं का मान बढ़ाया है। देवकी अम्मा को इससे पहले राष्ट्रीय स्तर पर ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ और ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। आज उनका यह तपोवन शोधकर्ताओं, छात्रों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक जीवित प्रयोगशाला बन चुका है। 92 वर्ष की आयु में भी वे अपने लगाए पेड़ों के बीच समय बिताती हैं और हर आने-जाने वाले को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं।

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