Iran–US warIran–US war
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Iran–US war : पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध की आहट और तेज हो गई है। ईरान ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में सैन्य संघर्ष और बढ़ता है, तो वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक कर सकता है। ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट किया है कि उनकी समुद्री सीमा के पास किसी भी प्रकार का अमेरिकी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा

Iran–US war होर्मुज जलडमरूमध्य को विश्व का चौथा सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील शिपिंग रूट माना जाता है। भौगोलिक दृष्टि से यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसकी महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) के व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए पूरी तरह इसी रास्ते पर निर्भर हैं। ईरान का तर्क है कि यदि अमेरिका उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाता है या सैन्य हमला करता है, तो उसे अपनी सुरक्षा के लिए इस मार्ग को नियंत्रित करने का पूरा अधिकार है। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

अमेरिका के साथ सैन्य टकराव और ‘एस्केलेशन’ का डर

Iran–US war ईरान की यह धमकी अमेरिका द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने और इजरायल के समर्थन में कड़े कदम उठाने की प्रतिक्रिया में आई है। हाल के हफ्तों में, अमेरिकी नौसेना और ईरानी ड्रोनों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ है। ईरान का मानना है कि अमेरिका क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहा है और उसकी संप्रभुता को चुनौती दे रहा है।

ईरानी कमांडरों ने चेतावनी दी है कि उनके पास आधुनिक मिसाइल प्रणाली और ‘आत्मघाती ड्रोन्स’ का बेड़ा है, जो किसी भी व्यापारिक या सैन्य जहाज को इस मार्ग से गुजरने से रोकने में सक्षम है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इस धमकी पर अमल करता है, तो यह सीधे तौर पर एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है, जिसमें कई अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर संभावित प्रभाव

Iran–US war होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का असर केवल अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया इसकी चपेट में आएगी।

  • तेल की कीमतें: जानकारों का मानना है कि इस मार्ग के बंद होते ही कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का संकट पैदा हो जाएगा।
  • भारत की चिंता: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इस मार्ग में बाधा आने से भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतें घरेलू बाजार में आसमान छू सकती हैं।
  • सप्लाई चेन: तेल के अलावा, इस मार्ग से बड़े पैमाने पर एलएनजी (LNG) और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का व्यापार होता है। इसकी रुकावट से वैश्विक ‘सप्लाई चेन’ पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।

ईरान की यह चेतावनी फिलहाल एक दबाव बनाने की रणनीति (Pressure Tactic) मानी जा रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह के मानवीय और आर्थिक संकट को टाला जा सके।

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