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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Dabra : ग्वालियर जिले के डबरा से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ एक प्राचीन मंदिर की जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। आरोप है कि यह निर्माण कार्य राजनीतिक रसूख और फर्जी दस्तावेजों के सहारे किया जा रहा था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

Dabra भाजपा नेता पर जमीन हथियाने और फर्जी वसीयत के आरोप

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस विवाद के केंद्र में भाजपा के पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष वीरेंद्र जैन चौधरी हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर एक जैन परिवार की निजी जमीन पर कब्जा किया है। बताया जा रहा है कि उक्त जमीन पर पहले से एक मंदिर और रिहायशी हिस्सा था, जहाँ एक परिवार निवास करता था। आरोप है कि वीरेंद्र जैन ने परिवार की एक दिवंगत महिला की फर्जी वसीयत तैयार कर पूरी संपत्ति को अपने नाम करवा लिया और मंदिर तोड़कर नया भवन बनाना शुरू कर दिया।

Dabra हाई कोर्ट की शरण में पहुंचा पीड़ित परिवार

जमीन के असली वारिसों और परिवार के सदस्यों ने इस “दबंगई” के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। पीड़ित पक्ष द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फर्जी वसीयत और अवैध कब्जे के सबूत पेश किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से स्टे (रोक) लगा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी के बीच हाई कोर्ट का यह निर्णय न्याय की जीत है।

Dabra समाज के भीतर भी उठने लगे विरोध के स्वर

इस मामले ने अब सामाजिक मोड़ भी ले लिया है। जैन समाज के ही कुछ जागरूक सदस्यों ने प्रेस के सामने आकर इस निर्माण को अनैतिक और गलत बताया है। समाज के लोगों का कहना है कि धर्म के नाम पर किसी की निजी संपत्ति या पुराने मंदिर को तोड़कर उस पर कब्जा करना स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल, निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है और सभी की निगाहें अब कोर्ट की अगली कार्रवाई और पुलिस जांच पर टिकी हैं।

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