By: Ravindra Singh
Guru Pradosh Vrat : 24 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि और गुरुवार का संयोग बन रहा है। इसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। त्रयोदशी तिथि रात 11:19 बजे तक रहेगी। वहीं दोपहर 3:55 बजे तक धृति योग रहेगा। सुबह 10:35 बजे तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा और इसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। इस दिन पंचक भी रहेगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं 24 सितंबर का पंचांग, प्रदोष पूजा का शुभ समय, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
Guru Pradosh Vrat 24 सितंबर 2026 का पंचांग
- त्रयोदशी तिथि: रात 11:19 बजे तक
- धृति योग: दोपहर 3:55 बजे तक
- नक्षत्र: सुबह 10:35 बजे तक धनिष्ठा, इसके बाद शतभिषा
- विशेष: पंचक और प्रदोष व्रत
- प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 6:33 बजे से रात 8:56 बजे तक
Guru Pradosh Vrat 24 सितंबर के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:16 बजे से 6:28 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:55 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:31 बजे से 3:20 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:33 बजे से 6:57 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 6:33 बजे से 7:45 बजे तक
Guru Pradosh Vrat 24 सितंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 6:09 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:15 बजे
Guru Pradosh Vrat गुरु प्रदोष व्रत का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।
प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के नाम से उसका स्वरूप जाना जाता है। इस बार त्रयोदशी गुरुवार को पड़ रही है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना भी विशेष फलदायी माना जाता है।
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