Anant ChaturdashiAnant Chaturdashi
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By: Ravindra Singh

Anant Chaturdashi : अनंत चतुर्दशी का पर्व इस वर्ष 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और श्रद्धालु व्रत रखकर अनंत सूत्र धारण करते हैं। मान्यता है कि अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं, जो भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और उनकी कृपा का प्रतीक मानी जाती हैं।

अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्रत कथा का पाठ भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कथा में ऋषि कौंडिन्य और उनकी पत्नी सुशीला का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा।

सुमंत ब्राह्मण की बेटी थी सुशीला

Anant Chaturdashi पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में सुमंत नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम दीक्षा था और उनकी एक पुत्री थी, जिसका नाम सुशीला था। सुशीला धार्मिक प्रवृत्ति और अच्छे संस्कारों वाली कन्या थी।

समय बीतने के साथ सुशीला की मां का निधन हो गया। इसके बाद सुमंत ने कर्कशा नाम की महिला से दूसरा विवाह किया। जब सुशीला विवाह योग्य हुई तो उसका विवाह ऋषि कौंडिन्य के साथ कर दिया गया।

विदाई के समय सुमंत अपनी बेटी को कुछ देना चाहते थे, लेकिन उसकी सौतेली मां कर्कशा ने दामाद को धन-संपत्ति देने के बजाय ईंट और पत्थर के टुकड़े बांधकर दे दिए। इससे कौंडिन्य ऋषि को बहुत दुख हुआ। इसके बाद वह सुशीला को साथ लेकर अपने आश्रम की ओर निकल पड़े।

सुशीला ने नदी किनारे किया अनंत व्रत

Anant Chaturdashi रास्ते में रात होने पर कौंडिन्य ऋषि और सुशीला एक नदी के किनारे ठहर गए। वहां सुशीला ने कुछ महिलाओं को एक विशेष पूजा करते हुए देखा। जब उसने उनके पूजा करने का कारण पूछा तो महिलाओं ने उसे अनंत व्रत के बारे में बताया।

अनंत व्रत की महिमा सुनकर सुशीला ने भी उसी स्थान पर विधि-विधान से भगवान अनंत की पूजा की। पूजा के बाद उसने चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र अपने हाथ में बांध लिया और अपने पति के पास लौट आई।

कौंडिन्य ऋषि ने जब उसके हाथ में बंधे सूत्र के बारे में पूछा तो सुशीला ने उन्हें पूरी बात बता दी। हालांकि, ऋषि ने अनंत सूत्र को महत्व नहीं दिया और उसे निकालकर अग्नि में डाल दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान अनंत के इस अपमान के बाद उनके परिवार की समृद्धि धीरे-धीरे समाप्त होने लगी।

संपत्ति नष्ट होने पर कौंडिन्य को हुआ पश्चाताप

Anant Chaturdashi कुछ समय बाद कौंडिन्य ऋषि ने देखा कि उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने सुशीला से इसका कारण पूछा। तब सुशीला ने बताया कि अनंत सूत्र के अपमान के कारण ही यह विपत्ति आई है।

अपनी भूल का एहसास होने पर कौंडिन्य ऋषि भगवान अनंत से क्षमा मांगने के लिए उन्हें खोजते हुए वन की ओर निकल पड़े। उन्होंने काफी समय तक भगवान को खोजा, लेकिन जब दर्शन नहीं हुए तो वह निराश होकर मूर्छित हो गए।

भगवान अनंत ने ऋषि को दिया आशीर्वाद

Anant Chaturdashi मान्यता के अनुसार, कौंडिन्य ऋषि की तपस्या और पश्चाताप से प्रसन्न होकर भगवान अनंत उनके सामने प्रकट हुए। भगवान ने उन्हें बताया कि अनंत सूत्र का अनादर करने के कारण उन्हें कष्टों का सामना करना पड़ा।

भगवान अनंत ने ऋषि को निर्देश दिया कि वह घर लौटकर श्रद्धा के साथ अनंत व्रत का पालन करें। मान्यता के अनुसार चौदह वर्षों तक इस व्रत को करने और निर्धारित समय पर विधिपूर्वक उद्यापन करने से उनके कष्ट दूर होंगे और परिवार में सुख-समृद्धि लौट आएगी।

कौंडिन्य ऋषि ने भगवान की आज्ञा का पालन किया और विधि-विधान से अनंत व्रत किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके पुण्य प्रभाव से उनके जीवन की परेशानियां दूर हुईं और परिवार में फिर से समृद्धि आई।

महाभारत से भी जुड़ा है अनंत व्रत

Anant Chaturdashi अनंत चतुर्दशी की मान्यता महाभारत काल से भी जुड़ी बताई जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर युधिष्ठिर ने भी भगवान अनंत का व्रत किया था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को कठिन परिस्थितियों से निकलने और अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सहायता मिली।

14 गांठों वाले अनंत सूत्र का क्या महत्व है?

Anant Chaturdashi अनंत चतुर्दशी पर बांधा जाने वाला सूत्र आमतौर पर 14 गांठों वाला होता है। धार्मिक मान्यताओं में इन गांठों को विशेष महत्व दिया गया है। श्रद्धालु भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का स्मरण करते हुए इसे धारण करते हैं। मान्यता है कि अनंत सूत्र भगवान की कृपा, रक्षा और समृद्धि का प्रतीक है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाओं और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही लें।

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