By: Ravindra Singh
Diwali : दीपावली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश भी देता है। दीपावली को अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक माना जाता है।

‘दीपावली’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ और ‘आवली’ से मिलकर बना है। दीप का अर्थ है दीया और आवली का अर्थ है पंक्ति। इस तरह दीपावली का शाब्दिक अर्थ दीपों की पंक्ति होता है। इस दिन लोग अपने घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों को दीपों, रंगोली और आकर्षक रोशनी से सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन से जुड़ा है दीपावली का इतिहास
Diwali दीपावली मनाने के पीछे भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की प्रसिद्ध पौराणिक कथा प्रचलित है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने चौदह वर्षों का वनवास पूरा करने के बाद रावण का वध किया और माता सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे।
प्रभु श्रीराम के आगमन की खुशी में अयोध्या के लोगों ने पूरे नगर को दीपों से रोशन कर दिया था। घरों से लेकर गलियों और राजमार्गों तक दीप जलाए गए थे। चारों ओर उत्सव का माहौल था। इसी परंपरा को याद करते हुए हर साल कार्तिक अमावस्या को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व हमें सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा क्यों की जाती है?
Diwali दीपावली की रात मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, सुंदर तथा प्रकाश से जगमगाते घरों में निवास करती हैं।
इसी विश्वास के चलते लोग दीपावली से पहले अपने घरों और दुकानों की अच्छी तरह सफाई करते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ भगवान गणेश की आराधना भी की जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। वहीं धन के देवता कुबेर की पूजा भी इस दिन की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की उपासना से जीवन में धन, बुद्धि और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
समुद्र मंथन से हुआ था मां लक्ष्मी का प्राकट्य, जानें पौराणिक कथा
Diwali पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के उद्देश्य से मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया था। इस समुद्र मंथन से एक के बाद एक चौदह दिव्य रत्न और अनमोल वस्तुएं प्रकट हुईं। इन्हीं में मां लक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ था।
कथा के मुताबिक, मां लक्ष्मी कमल के पुष्प पर विराजमान होकर समुद्र से प्रकट हुईं। उनके आगमन से चारों ओर दिव्य आभा फैल गई। देवताओं और ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की। इसके बाद भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी का प्राकट्य कार्तिक अमावस्या को हुआ था। इसी वजह से दीपावली के दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त दीप प्रज्वलित करके माता का स्वागत करते हैं और परिवार में धन-धान्य, सुख, शांति तथा खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए ऐसे करें तैयारी
Diwali दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं। मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का बंदनवार लगाएं। शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा की तैयारी शुरू करें।
पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें। साथ ही भगवान कुबेर का चित्र या प्रतीक भी रख सकते हैं।
चौकी के पास चावल की ढेरी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें। कलश में गंगाजल, अक्षत, सुपारी और पुष्प डालें। आम के पत्ते लगाकर ऊपर लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल रखें। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
धार्मिक परंपरा में सोने और चांदी को शुभ माना गया है। इसलिए पूजा में सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के रखे जा सकते हैं। यदि यह उपलब्ध न हो तो सामान्य सिक्के भी श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जा सकते हैं।
लक्ष्मी पूजन में इन चीजों को करें शामिल
Diwali दीपावली के पूजन में अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न वस्तुएं शामिल की जाती हैं। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा की थाली में खील-बताशे, मिठाई, फल और अन्य पारंपरिक पकवान रखे जाते हैं।
इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निम्नलिखित वस्तुओं का भी विशेष महत्व है:
- पीली कौड़ियां
- गोमती चक्र
- कमलगट्टा
- एकाक्षी नारियल
- साबुत धनिया
- अक्षत और जायफल
- पान के पत्ते और सुपारी
- फल, मिठाई और खील-बताशे
- घी और मिट्टी के दीपक
मां लक्ष्मी को कमल और गुलाब के फूल अर्पित किए जाते हैं। भगवान गणेश को गुड़हल का फूल चढ़ाने की परंपरा है, जबकि कुबेर जी की पूजा में सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने की पूरी विधि
Diwali दीपावली की शाम पूजा के लिए सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प करें। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा की शुरुआत करें।
पूजा के दौरान इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
- सबसे पहले मिट्टी के दीपक में शुद्ध घी डालकर दीप प्रज्वलित करें।
- मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी को रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- देवी लक्ष्मी को कमल और गुलाब के फूल चढ़ाएं।
- भगवान गणेश को गुड़हल का पुष्प अर्पित करें।
- धूप और दीप जलाकर देवी-देवताओं की आराधना करें।
- खील-बताशे, फल, मिठाई और अन्य पकवानों का भोग लगाएं।
- मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।
- संभव हो तो श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- परिवार के सभी सदस्यों के साथ भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आरती करें।
पूजा पूरी होने के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन, बालकनी और अन्य स्थानों पर दीप जलाएं। अंत में मां लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करें। सभी सदस्यों को प्रसाद बांटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
दीपावली का पर्व देता है सुख, शांति और सकारात्मकता का संदेश
Diwali दीपावली केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने वाला त्योहार भी है। इस दिन लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और खुशियां साझा करते हैं।
दीपों की रोशनी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, सकारात्मक सोच और सच्चाई के रास्ते पर चलकर हर अंधकार को दूर किया जा सकता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व हर घर में सुख, समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक है।
ये भी पढे: 8 नवंबर 2026, दिवाली पर इन राशियों की चमकेगी किस्मत, मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा

