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रिपोर्टर: दिनेश कुमार

Health Minister : बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बिहार सरकार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत की अध्यक्षता में हुई इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में राज्य के सभी प्रमंडलों के क्षेत्रीय अपर निदेशक, सभी जिलों के सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और सरकारी अस्पतालों की मौजूदा व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई।

Health Minister मरीजों की सुविधा पहली प्राथमिकता: अस्पतालों में लगेंगे ‘May I Help You’ डेस्क

बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने स्पष्ट किया कि सूबे के हर नागरिक तक समय पर और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों के मार्गदर्शन के लिए हर अस्पताल में “May I Help You” (क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूँ) हेल्प डेस्क को अनिवार्य और सुदृढ़ किया जाए, ताकि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

Health Minister ओपीडी की भीड़ पर लगेगा अंकुश: टोकन डिस्प्ले सिस्टम से मैनेज होगी कतार

अस्पतालों के बाह्य रोगी विभाग (OPD) में लगने वाली लंबी लाइनों और अव्यवस्था पर संज्ञान लेते हुए मंत्री ने कतार प्रबंधन (Queue Management) को बेहतर करने के निर्देश दिए। अब ओपीडी में मरीजों की बढ़ती तादाद के हिसाब से पर्याप्त रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही, मरीजों को कतारों की परेशानी से बचाने के लिए ‘टोकन डिस्प्ले सिस्टम’ लागू किया जाएगा। दवाओं के वितरण, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जांच केंद्रों पर भी सेवाओं को पूरी तरह सुचारू और पारदर्शी बनाने के आदेश दिए गए हैं।

Health Minister रेफरल सिस्टम में बदलाव: स्थानीय स्तर पर इलाज देने पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि आगामी 15 जुलाई से जिला अस्पतालों में एक नई और अधिक प्रभावी रेफरल प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई नीति का उद्देश्य जिला और स्थानीय स्तर के अस्पतालों को आत्मनिर्भर बनाना है। डॉक्टरों को हिदायत दी गई है कि वे मरीजों को हर संभव स्थानीय स्तर पर ही उचित और गुणवत्तापूर्ण इलाज मुहैया कराएं। किसी मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थान (जैसे मेडिकल कॉलेज) में केवल बेहद गंभीर परिस्थितियों में ही रेफर किया जाए, जिससे बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक बोझ न बढ़े और मरीजों का कीमती समय व पैसा बच सके।

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