रिपोर्टर: नेहा गुप्ता
Bhojpur : बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसा हैरान और आक्रोशित कर देने वाला मामला सामने आया है, जो सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को बयां करता है। यहाँ पिरौटा गांव के रहने वाले एक बुजुर्ग ढोला राम पूरी तरह जीवित हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों ने उन्हें “मृत” घोषित कर दिया है। तंत्र की इस घोर लापरवाही का खामियाजा अब इस लाचार बुजुर्ग को भुगतना पड़ रहा है।
Bhojpur ₹1100 की वृद्धा पेंशन बंद, बुढ़ापे की लाठी छीनी
सरकारी रिकॉर्ड में ‘मौत’ दर्ज हो जाने के कारण ढोला राम को हर महीने मिलने वाली ₹1100 की सामाजिक सुरक्षा वृद्धावस्था पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। यह मामूली सी रकम इस बुजुर्ग के लिए बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी। अब पेंशन बंद होने से उनके घर का चूल्हा जलना और रोजमर्रा का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
Bhojpur शरीर साथ नहीं देता, फिर भी हाथों में कागजात लेकर भटक रहे बुजुर्ग
ढोला राम शारीरिक रूप से काफी कमजोर हैं और उन्हें चलने-फिरने में भी गंभीर समस्या होती है। इसके बावजूद, खुद को जिंदा साबित करने की जंग में वह हर दिन प्रशासनिक दफ्तरों की खाक छान रहे हैं।
- वह पिछले कई दिनों से लगातार तहसील (ब्लॉक) से लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
- अधिकारियों के सामने खुद खड़े होकर अपने जीवित होने का साक्ष्य देने के बाद भी, लालफीताशाही के चलते अभी तक उनका नाम ‘जीवित’ लोगों की सूची में वापस नहीं जोड़ा गया है।
Bhojpur ग्रामीणों में आक्रोश, सुधार की मांग
इस अमानवीय घटना को लेकर पिरौटा गांव के ग्रामीणों में भारी रोष है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर विशेष जांच कराई जाए। ढोला राम को कागजों में जल्द से जल्द ‘जीवित’ घोषित कर उनकी रुकी हुई पूरी बकाया राशि (Arrears) के साथ पेंशन योजना को दोबारा बहाल किया जाए।
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