Allahabad High Court:उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पुलिस द्वारा अवैध शराब के साथ जब्त की गई एक एसयूवी (SUV) को थाने से बाहर ले जाकर इस्तेमाल किया गया और कुछ ही दिनों बाद एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला की मौत हो गई। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग द्वारा आरोपी पुलिसकर्मियों को दी गई मामूली सजा पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब्त वाहनों का इस तरह बिना अनुमति दुरुपयोग करना और मामूली विभागीय कार्रवाई करना न्याय प्रणाली के खिलाफ है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ हादसा?
Allahabad High Court:यह पूरा वाकया 16 अप्रैल 2021 का है, जब बुलंदशहर के रामघाट थाने की पुलिस ने एक एसयूवी को जब्त किया था। पुलिस के अनुसार, इस गाड़ी से अवैध शराब के 19 कार्टन बरामद हुए थे। वाहन जब्ती की प्रक्रिया चल ही रही थी कि 4 जून 2021 को उस गाड़ी को थाने से बाहर निकाल लिया गया।
राज्य सरकार द्वारा कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, तत्कालीन हेड मोहर्रिर सीताराम ने कांस्टेबल पंकज राणा और नरेंद्र सिंह के साथ मिलकर इस गाड़ी का इस्तेमाल एक वांछित आरोपी को पकड़ने के लिए की गई रेड में किया था। यह भी बताया गया कि यह सब तत्कालीन एसएचओ (SHO) बीरेंद्र सिंह की जानकारी के बिना हुआ था। थाने से गाड़ी निकलने के मात्र तीन दिन बाद यानी 7 जून 2021 को मथुरा के राया इलाके में इस एसयूवी का भीषण एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में मनोज कुमार के माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए, और इलाज के दौरान मनोज की मां की मौत हो गई। मथुरा पुलिस ने इस दुर्घटना के बाद गाड़ी को दोबारा अपने कब्जे में ले लिया था।
मामूली ‘सेंसर एंट्री’ पर हाईकोर्ट की कड़ी आपत्ति
Allahabad High Court:जब यह मामला हाईकोर्ट के सामने आया और कोर्ट ने पूछा कि इस गंभीर लापरवाही के लिए पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया, तो पता चला कि तत्कालीन बुलंदशहर एसएसपी (SSP) ने विभागीय कार्रवाई को बंद करते हुए हेड मोहर्रिर और दोनों कांस्टेबलों को केवल ‘सेंसर एंट्री’ की मामूली सजा दी थी।
जस्टिस अनिल कुमार ने अपने आदेश में इस बात पर गहरी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि वाहन को बिना अनुमति थाने से निकालकर इस्तेमाल करना, उसकी सुरक्षा के नियमों का खुला उल्लंघन है और इसके परिणामस्वरूप एक मासूम की जान चली गई। ऐसे गंभीर मामले में केवल ‘सेंसर एंट्री’ देना प्रथम दृष्टया पूरी तरह अपर्याप्त और लचर रवैया प्रतीत होता है।
डीजीपी करेंगे तत्कालीन SHO और SSP की भूमिका की जांच
Allahabad High Court:हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी (DGP) को आदेश दिया है कि वे मामले की गहराई से जांच करें। जांच में यह देखा जाएगा कि पुलिसकर्मियों का यह आचरण चोरी, आपराधिक गबन या आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) के दायरे में आता है या नहीं। इसके साथ ही, तत्कालीन एसएचओ बीरेंद्र सिंह की देखरेख और तत्कालीन बुलंदशहर एसएसपी की भूमिका की भी जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पहले की गई विभागीय कार्रवाई निष्पक्ष थी या नहीं।
वाहन मालिक की याचिका खारिज
Allahabad High Court:इस बीच, अदालत ने वाहन मालिक की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी एसयूवी की जब्ती को चुनौती दी थी। हालांकि, अदालत ने माना कि पुलिस अधिकारियों द्वारा जब्त वाहन को सुरक्षित रखने के बजाय उसके प्रशासनिक प्रबंधन में गंभीर चूक बरती गई। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि जब्त वाहनों का इस तरह अवैध रूप से इस्तेमाल होने दिया जाएगा और दोषियों को मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाएगा, तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा

