रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Ahmedabad : गुजरात की अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. इस नेटवर्क को ‘बॉस स्कैम’ के नाम से जाना जा रहा है, जिसमें जालसाज कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों (CEO/डायरेक्टर) के फर्जी प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों और आम लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करते थे. पुलिस जांच में इस रैकेट के तार भारत के अलावा चीन, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े पाए गए हैं.
Ahmedabad 4500 से अधिक फर्जी सिम और 21,000 OTP का अवैध कारोबार
जांच के दौरान पुलिस ने खुलासा किया कि आरोपी प्वाइंट-ऑफ-सेल (POS) एजेंट के रूप में काम करते हुए आम लोगों के बायोमेट्रिक डेटा का गलत इस्तेमाल करते थे। वे ग्राहकों की जानकारी के बिना अन्य टेलीकॉम कंपनियों के नाम पर फर्जी ‘डमी सिम’ एक्टिवेट कर लेते थे। आरोपी अब तक करीब 4,500 फर्जी सिम कार्ड तैयार कर चुके थे और व्हाट्सएप व ई-कॉमर्स खातों के सत्यापन के लिए 21,000 से अधिक OTP बेच चुके थे। इन्हीं सिम और ओटीपी का उपयोग करके जालसाज व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे।
Ahmedabad चीन-पाकिस्तान की सांठगांठ और मैलवेयर का इस्तेमाल
तकनीकी विश्लेषण में पाया गया कि इस साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल किया गया खतरनाक मैलवेयर चीन से जुड़े साइबर अपराधियों द्वारा विकसित किया गया था। वहीं, भारत में लोगों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित कॉल सेंटरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। ठगी के पैसे को सुरक्षित रखने और अपनी लोकेशन छिपाने के लिए जालसाज चीन आधारित वीपीएन (VPN) नेटवर्क का उपयोग करते थे।
देशभर के 26 राज्यों में फैला जाल, जांच जारी
पुलिस ने जब्त किए गए मोबाइल उपकरणों और सिम कार्डों के आधार पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की जांच की, जिसमें देश के 26 राज्यों से जुड़ी 251 शिकायतों का संबंध इस गिरोह से पाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भारत में इस इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने वाले स्थानीय एजेंटों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि विदेश में बैठे मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
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