by-Ravindra Sikarwar
एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने खुलासा किया कि भारतीय सशस्त्र बल अगले महीने के पहले सप्ताह में एक प्रमुख संयुक्त अभ्यास आयोजित करने वाले हैं, जिसका नाम ‘कोल्ड स्टार्ट 1’ है। यह अभ्यास मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्र में 6 से 10 अक्टूबर तक चलेगा और ड्रोन तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों की क्षमताओं का परीक्षण करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से यह सबसे बड़ा ऐसा ड्रिल होगा, जो वायु रक्षा प्रणालियों की प्रभावकारिता और कमियों का मूल्यांकन करने पर केंद्रित होगा। इस अभ्यास में सेना, नौसेना और वायुसेना के अलावा उद्योग समूह, शोधकर्ता और विश्वविद्यालय भी भाग लेंगे, ताकि स्वदेशी तकनीकों को मजबूत किया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ और सबक:
यह अभ्यास अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर आधारित है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इसके जवाब में पाकिस्तानी पक्ष ने पश्चिमी क्षेत्र को निशाना बनाते हुए कई ड्रोन हमले किए, लेकिन भारत के काउंटर-ड्रोन और जीपीएस जैमिंग सिस्टम ने इन हमलों से कोई नुकसान नहीं होने दिया। एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित, एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख, ने हाल ही में एक सम्मेलन में कहा कि “हमारे सिस्टम ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन दुश्मन ने भी हमारी क्षमताओं को सीख लिया है। इसलिए हमें हमेशा एक कदम आगे रहना होगा।”
ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल संघर्ष की प्रकृति को बदल दिया, बल्कि ड्रोन युद्ध की वास्तविकता को उजागर किया। इसमें स्वार्म ड्रोन, कमिकेज ड्रोन और लगातार आसमान से खुफिया निगरानी जैसी चुनौतियां सामने आईं। एयर मार्शल राकेश सिन्हा, एकीकृत रक्षा स्टाफ के उप प्रमुख (ऑपरेशंस), ने जोर दिया कि दुश्मनों (जैसे पाकिस्तान) द्वारा ड्रोन तकनीक में तेजी से प्रगति हो रही है, इसलिए भारत को अपनी रणनीतियों में सतर्क रहना होगा।
अभ्यास का उद्देश्य और गतिविधियां:
‘कोल्ड स्टार्ट 1’ अभ्यास का मुख्य लक्ष्य उभरती हवाई खतरों के खिलाफ वायु रक्षा की तत्परता का परीक्षण करना है। यह हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) द्वारा आयोजित किया जाएगा और तीनों सेनाओं की संयुक्त भागीदारी पर जोर देगा। अभ्यास के दौरान निम्नलिखित पर फोकस होगा:
- ड्रोन घुसपैठ का सिमुलेशन: कई शत्रु ड्रोन हमलों की नकल की जाएगी, जिसमें पता लगाना, ट्रैकिंग, जीपीएस जैमिंग और निष्प्रभावी करने की क्षमताओं का परीक्षण होगा।
- काउंटर-यूएवी सिस्टम (सी-यूएएस): जटिल विद्युतचुंबकीय वातावरण में सटीक पहचान और न्यूनतम संपार्श्विक क्षति के साथ निष्प्रभावीकरण पर ध्यान। यह सिस्टम शांति और युद्ध दोनों समय उपयोगी होंगे, क्योंकि असामाजिक तत्व भी ड्रोन प्राप्त कर रहे हैं।
- एकीकृत रक्षा अवधारणा: ‘सुदर्शन चक्र’ से प्रेरित एकीकृत प्रणाली का परीक्षण, जो ड्रोन, यूएवी, हाइपरसोनिक हथियारों और अन्य खतरों का सामना कर सके।
- स्वदेशी तकनीकों का मूल्यांकन: कई उपकरण स्वदेशी हैं, और अभ्यास से उनकी कमियों को पहचाना जाएगा ताकि सुधार हो सके।
मध्य प्रदेश का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह मध्य क्षेत्र में स्थित है, जहां आर्मी वॉर कॉलेज (महू) जैसे संस्थान पहले से ही सक्रिय हैं। यह अभ्यास अगस्त 2025 में महू में आयोजित ‘रण संवाद’ सेमिनार के बाद आ रहा है, जो युद्ध और युद्धकला पर त्रि-सेवा चर्चा का पहला आयोजन था।
भागीदारी और महत्व:
अभ्यास में तीनों सेनाओं के अलावा उद्योग भागीदार, शोध संस्थान और शैक्षणिक संस्थान शामिल होंगे, जो तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देंगे। एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि “ड्रोन अब संभावना नहीं, बल्कि वास्तविकता हैं, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर में देखा गया। हमें व्यापक काउंटर-ड्रोन क्षमताओं की आवश्यकता है।”
यह अभ्यास भारत की सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्रीय खतरों (विशेष रूप से पश्चिमी सीमा पर) से निपटने की तैयारी को मजबूत करेगा। इससे न केवल वर्तमान क्षमताओं का मूल्यांकन होगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए योजना बनाने में मदद मिलेगी।
‘कोल्ड स्टार्ट 1’ भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने का प्रयास है, जो ऑपरेशन सिंदूर के सबकों पर आधारित है। जैसे-जैसे दुश्मन अपनी तकनीकों को अपनाते जा रहे हैं, भारत को अपनी वायु रक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है। यह अभ्यास न केवल सैन्य तत्परता का प्रतीक है, बल्कि स्वदेशी नवाचारों को प्रोत्साहन भी देगा। नवीनतम अपडेट्स के लिए आधिकारिक रक्षा चैनलों और समाचार स्रोतों पर नजर रखें। जय हिंद!
