रिपोर्टर: अतहर खान
Munger : बिहार के मुंगेर जिले में बच्चों के सुनहरे भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की गई है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की ओर से जिला स्तरीय भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लेकर समाज से बाल श्रम रूपी अभिशाप को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया।

Munger संयुक्त श्रम भवन में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ आगाज
मुंगेर के आईटीआई परिसर स्थित संयुक्त श्रम भवन में आयोजित इस जिला स्तरीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कुमार अभिषेक, श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश और कारखाना निरीक्षक मुकेश कुमार पांडेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की कमान ‘परिवार विकास एनजीओ’ की अध्यक्ष पिंकी कुमारी के हाथों में रही, जिन्होंने सामाजिक स्तर पर इस बुराई के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत पर बल दिया।
Munger 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध: श्रम अधीक्षक
मंच से बोलते हुए श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश ने कड़े लहजे में कहा कि बाल श्रम न केवल कानूनन जुर्म है, बल्कि यह मासूमों के भविष्य की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के मुताबिक 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी रूप में मजदूरी कराना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है। अधिकारियों ने आमजन और श्रमिकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि बच्चों के हाथों में औजारों की जगह किताबें थमाएं और उन्हें अनिवार्य रूप से स्कूल भेजें।
Munger मेधावी छात्र-छात्राएं हुए सम्मानित
इस विशेष जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाते हुए श्रम विभाग की ओर से पूर्व में निबंध लेखन और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। कार्यक्रम के अंतिम चरण में इन प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूली छात्र-छात्राओं को अधिकारियों द्वारा मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, ताकि अन्य बच्चे भी शिक्षा के प्रति प्रेरित हो सकें।
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