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रिपोर्टर: रतन कुमार

Jamtara : झारखंड के स्वास्थ्य दावों और प्रशासनिक संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा करने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के गृह जिले जामताड़ा में एक लाचार परिवार को आपातकालीन स्थिति में ‘108 एंबुलेंस’ तक मयस्सर नहीं हुई। नतीजतन, बेबस परिजनों को मरीज को खटिया पर लिटाकर ट्रैक्टर के जरिए अस्पताल ले जाना पड़ा। दुर्भाग्य से, समय पर इलाज न मिलने के कारण मरीज ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

Jamtara रात में बिगड़ी तबीयत, घंटो इंतजार के बाद भी नहीं आई एंबुलेंस

दिल दहला देने वाला यह मामला जामताड़ा प्रखंड की गोपालपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले दूधकेवरा गांव का है। यहाँ के रहने वाले 43 वर्षीय मुनू टुडू की शुक्रवार की रात अचानक तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई। घबराए परिजनों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत सरकारी आपातकालीन एंबुलेंस सेवा ‘108’ को फोन मिलाया। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी गांव तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची।

Jamtara मजबूरी में ट्रैक्टर को बनाया एंबुलेंस, पर तब तक हो चुकी थी देर

जब मुनू की हालत लगातार नाजुक होती चली गई, तो ग्रामीणों और परिजनों ने खुद ही हिम्मत जुटाई। गांव में एंबुलेंस न मिलने पर उन्होंने मजबूरी में एक ट्रैक्टर का इंतजाम किया, उस पर खटिया लादी और मुनू को लिटाकर जामताड़ा सदर अस्पताल की तरफ भागे। ग्रामीण अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर मरीज को जैसे-तैसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद मुनू टुडू को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के जवाब देते ही अस्पताल परिसर चीखों से गूंज उठा।

Jamtara स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में बदहाली पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

इस दुखद मौत के बाद दूधकेवरा गांव में मातम पसरा हुआ है, तो वहीं लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासियों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार और नेता मंचों से स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ होने के बड़े-बड़े ढोल पीटते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी आदिम युग जैसी है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और ग्रामीण अंचलों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को तुरंत दुरुस्त करने की पुरजोर मांग की है।

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