रिपोर्टर: सागर राठौर
MCB : छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल देने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। एक मां ने अस्पताल के स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि नॉर्मल प्रसव कराने के फेर में नवजात बच्ची के दोनों पैरों, कूल्हे और हाथ की हड्डियां टूट गईं। अंबिकापुर में इलाज के दौरान जन्म के महज 24 दिन बाद बच्ची की मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
प्रसव से पहले स्वस्थ था बच्चा, फिर नॉर्मल डिलीवरी के नाम पर बरती गई लापरवाही
MCB पीड़ित परिवार के अनुसार, ग्राम पंचायत लालपुर के स्कूलपारा निवासी उपासना 10 सितंबर को अपने प्रसव के लिए मनेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल पहुंची थीं। प्रसव से पहले उनकी पांच बार सोनोग्राफी कराई गई थी, जिसमें डॉक्टरों ने बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होने की बात कही थी। हालांकि, गर्भ में बच्चे की स्थिति सीधी न होने के कारण ऑपरेशन (सिजेरियन) की आवश्यकता बताई गई थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने जबरन सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया, जिसके दौरान नवजात को गंभीर चोटें आ गईं।
एक्स-रे रिपोर्ट में सामने आए फ्रैक्चर, 24 दिन चले संघर्ष के बाद तोड़ा दम
MCB बच्ची के जन्म के बाद उसकी बिगड़ती हालत को देख परिजन उसे लेकर अंबिकापुर पहुंचे, जहां एक्स-रे कराने पर जो सच सामने आया उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। एक्स-रे रिपोर्ट के अनुसार, नवजात के दोनों पैरों की जांघों, कूल्हे और हाथ की हड्डियों में गंभीर फ्रैक्चर थे। डॉक्टरों ने प्रसव के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग और असावधानी बरते जाने की आशंका जताई। तमाम कोशिशों के बाद भी 24 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार बच्ची की मौत हो गई।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के आदेश
MCB इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ थाने में भी इसकी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। इस पर संज्ञान लेते हुए जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने एक जांच टीम गठित किए जाने की बात कही है और आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी डॉक्टर या स्टाफ दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

