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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : बिहार के सुपौल शहर स्थित झखराही हनुमान मंदिर परिसर में अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान उपस्थित युवाओं और स्वयंसेवकों ने बुजुर्गों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं प्रशस्ति पत्र सौंपकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।

यह आयोजन समाज में बुजुर्गों के प्रति आदर, संवेदनशीलता और उनके जीवन अनुभवों के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

बुजुर्ग समाज की अनमोल धरोहर, उनका मार्गदर्शन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

Supaul समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने अपने लंबे जीवन काल के संघर्षों, अनुभवों और संस्कारों से परिवार तथा देश को सींचा है। बुजुर्गों का विशाल अनुभव और मार्गदर्शन आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।

आधुनिक समय में बदलते पारिवारिक और सामाजिक परिवेश के बीच बुजुर्गों की आवश्यकताओं तथा उनके सम्मान की रक्षा करना हर नागरिक का नैतिक व सामाजिक कर्तव्य है। सम्मान पाकर सभी वरिष्ठजनों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता दिखाई दी।

केवल औपचारिकता न बने सम्मान, वर्षभर बनी रहे आदर की भावना

Supaul कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वरिष्ठजनों का आदर केवल किसी विशेष दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भावना वर्ष के 365 दिन कायम रहनी चाहिए। भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं को अपने घरों और आसपास के बुजुर्गों के साथ समय बिताना चाहिए, उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और उनकी देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए।

वक्ताओं ने अपील की कि समाज को एक ऐसा सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण तैयार करना होगा जहां हमारे बुजुर्ग गरिमापूर्ण और सुखमय जीवन व्यतीत कर सकें।

‘माय भारत’ के स्वयंसेवकों ने लिया बुजुर्गों की सेवा और अधिकारों के संरक्षण का संकल्प

Supaul इस विशेष समारोह में ‘माय भारत’ सुपौल के स्वयंसेवक केशव राज, पंकज, राज कुमार सहित कई युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। स्वयंसेवकों ने वरिष्ठ नागरिकों से सीधा संवाद कर उनके जीवन के अनुभवों को जाना और उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु होने की कामना की।

समारोह के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने समाज में बुजुर्गों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि वरिष्ठ नागरिकों का आदर करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक सशक्त और सुदृढ़ समाज की नींव है।

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