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रिपोर्टर: दीनानाथ माऔर

Shahabad : बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक सीरीस पुनपुन घाट पर शनिवार को एक भावुक और धार्मिक क्षण देखने को मिला। शाहाबाद रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) सत्यप्रकाश ने पुनपुन नदी के तट पर पहुंचकर सनातन परंपरा और पुत्र धर्म का निर्वहन किया। उन्होंने वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के बीच अपने स्वर्गीय माता-पिता की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना के साथ जल तर्पण अर्पित किया।

शास्त्रों में वर्णित पुनपुन नदी का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

Shahabad पत्रकारों से संवाद करते हुए डीआईजी सत्यप्रकाश ने पुनपुन नदी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों में पुनपुन नदी को अत्यंत पवित्र माना गया है। पितृपक्ष और तर्पण काल में जिन व्यक्तियों के माता-पिता या पूर्वज स्वर्गवासी हो चुके हैं, उन्हें अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए इस पवित्र तट पर आकर जल तर्पण अवश्य करना चाहिए।

गया श्राद्ध की प्रथम वेदी है पुनपुन तट, यहां पिंडदान का है विशेष विधान

Shahabad डीआईजी ने शास्त्रों का हवाला देते हुए बताया कि गयाजी में श्राद्ध-कर्म और पिंडदान करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुनपुन नदी का तट विशेष महत्व रखता है। मान्यता के अनुसार, गया श्राद्ध की यात्रा का शुभारंभ और प्रथम पिंडदान पुनपुन तट पर ही किया जाता है। इसे गया जी श्राद्ध की ‘प्रथम वेदी’ का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण आदि गंगा के रूप में पूजित पुनपुन के तट पर जल तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

डीआईजी की पितृभक्ति और सादगी की स्थानीय लोगों ने की सराहना

Shahabad धार्मिक अनुष्ठान के दौरान घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने डीआईजी सत्यप्रकाश के इस कर्तव्यनिष्ठा और पितृभक्ति रूपी कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच सनातन संस्कारों और पुत्र धर्म का इस तरह निष्ठापूर्वक पालन करना लोगों के लिए प्रेरणादायी रहा। अनुष्ठान संपन्न करने के बाद उन्होंने देश और प्रदेश में शांति व समृद्धि की भी कामना की।

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