Bahraich Triple Murder:उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की एक विशेष अदालत ने 32 साल पुराने चर्चित तिहरे हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में शामिल पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस दर्दनाक घटना में आरोपियों ने एक महिला को पेड़ से बांधकर उसके ही सामने उसके पति, बेटे और दामाद की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
क्या था पूरा मामला?
Bahraich Triple Murder:यह सनसनीखेज घटना 31 जुलाई 1994 को बहराइच के नानपारा कोतवाली क्षेत्र स्थित चौवाइनपुरवा गांव की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, श्यामलाल, रामफल, गोपी, ढोढ़े, गिरधारी, महावीर, विजयराज, गरीबे और राधेश्याम लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस होकर एक घर में घुसे थे।
हमलावरों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए चिरकू, उनके बेटे संतराम और दामाद मायाराम की हत्या कर दी। मृतक चिरकू की पत्नी सुमित्रा देवी ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया था कि जब वह अपने पति को बचाने के लिए आगे आईं, तो आरोपियों ने उन्हें जबरन एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद उनकी आंखों के सामने ही उनके पति, बेटे और दामाद को मौत के घाट उतार दिया गया। इस खौफनाक वारदात से पूरा इलाका सिहर उठा था।
अदालत का फैसला और जुर्माना
Bahraich Triple Murder:विशेष न्यायाधीश (SC-ST अधिनियम) पवन कुमार शर्मा की अदालत ने सुनवाई के बाद महावीर, गिरधारी, विजयराज, गरीबे और राधेश्याम को दोषी ठहराया। कोर्ट ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 1 लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत के आदेशानुसार, जुर्माने की आधी राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
4 आरोपियों की हो चुकी है मौत
Bahraich Triple Murder:लंबी चली कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के दौरान मुकदमे से जुड़ा एक और पहलू सामने आया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुकदमे की सुनवाई के दौरान चार आरोपी—श्यामलाल, रामफल, गोपी और ढोढ़े—की मृत्यु हो चुकी है, जिसके चलते उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पहले ही समाप्त कर दी गई थी। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के परिजनों ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया है।

