रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्तव
Jamshedpur : राजनीतिक रणनीतिकार, प्रख्यात लेखक एवं समाजसेवी डॉ. अतुल मलिकराम को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों और जनसेवा के लिए नई दिल्ली में एक विशेष समारोह के दौरान ‘भारतीय पद्म विभूषण सम्मान 2026-27’ से नवाजा गया है। यह सम्मान गैर-सरकारी संगठन ‘वर्ल्ड कल्चर एंड एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन कमीशन’ द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, साहित्य, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आभार व्यक्त करते हुए डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के प्रयासों की पहचान है, जिनके लिए वे वर्षों से समर्पित रहे हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने सभी सहयोगियों, शुभचिंतकों और समाज के लिए निरंतर काम करने वाले साथियों को दिया।
सामाजिक बदलाव और जन जागरूकता की दिशा में निरंतर प्रयास
Jamshedpur डॉ. मलिकराम लंबे समय से राजनीति, सामाजिक विषयों पर लेखन और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से देश के प्रमुख मुद्दों को उठाते रहे हैं। उनका मानना है कि समाज में असली बदलाव केवल बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की जमीनी स्तर पर मदद करने, युवाओं को मार्गदर्शन देने और पर्यावरण के प्रति जवाबदेही बढ़ाने से आता है। उनके सामाजिक अभियानों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे-केयर सेंटर, स्ट्रीट वेंडर्स और मोची भाइयों के लिए ‘मेरी पहचान’ अभियान, तथा बेजुबान पक्षियों व पशुओं के लिए दाना-पानी की व्यवस्था जैसी कई मानवीय पहल शामिल हैं।
‘2030 का भारत’ अभियान और साहित्यिक योगदान
Jamshedpur सामाजिक कल्याण के साथ-साथ डॉ. मलिकराम साहित्य के जरिए भी ज्वलंत मुद्दों पर प्रकाश डालते हैं। उनकी चर्चित पुस्तकें—दिल से, दिल ज़रा, दिल विल, और माय दिल गोज—गरीबी, भुखमरी, शिक्षा, जेल सुधार और सामाजिक विषमता जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। इसके अलावा, उन्होंने ‘2030 का भारत’ अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) जैसे शून्य भुखमरी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता
Jamshedpur पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति भी डॉ. मलिकराम बेहद सक्रिय रहे हैं। वे सार्वजनिक मंचों से लेकर जमीनी अभियानों तक सतत विकास और पर्यावरण की रक्षा का संदेश देते आए हैं। हाल ही में फरवरी 2026 में उन्होंने ‘ब्यूरो वेरिटास सर्टिफिकेशन’ की कार्बन फुटप्रिंट और जीएचजी (Greenhouse Gas) एकाउंटिंग से जुड़ी टेक्निकल वर्कशॉप सफलतापूर्वक पूरी की है। उनका यह कदम पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी तकनीकी समझ और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

