Nepal : पड़ोसी देश नेपाल से गांजे की खेती और इसके इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को यह ऐतिहासिक आदेश दिया है कि वह दवा निर्माण, वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग के लिए गांजे की खेती को वैध बनाने के वास्ते आगामी तीन महीनों के भीतर आवश्यक नियम तैयार करे। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि मादक पदार्थ या नशे के रूप में गांजे का सेवन करना देश में पूरी तरह से अवैध और प्रतिबंधित बना रहेगा।
अठारह महीने पुराना फैसला आया सामने, ऐसे हुआ खुलासा
Nepal न्यायालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय दरअसल 18 मई 2025 को ही सुनाया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों या हालिया राजनीतिक उठापटक के दौरान रिकॉर्ड प्रभावित होने के कारण इसका विस्तृत पाठ सार्वजनिक होने में करीब डेढ़ साल का समय लग गया। पिछले सप्ताह जब यह दस्तावेज सार्वजनिक हुआ, तो राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इसकी चर्चा फिर से तेज हो गई। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि सरकार द्वारा 1976 के कानून में दी गई कानूनी छूट के बावजूद नियम न बनाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
नारकोटिक ड्रग्स एक्ट और लाइसेंसिंग से जुड़ी पृष्ठभूमि
Nepal नेपाल में आधिकारिक तौर पर नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट, 1976 के तहत गांजे की खेती, बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगा हुआ है। हालांकि, इस पुराने कानून में ही चिकित्सा और अनुसंधान के लिए विशेष नियमों के तहत इसकी अनुमति देने का प्रावधान भी मौजूद था, जिसे कभी अमली जामा नहीं पहनाया गया। देश में लंबे समय से गांजे को वैध बनाने की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का जोरदार स्वागत किया है, जिससे नेपाल की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ऐतिहासिक ‘हिप्पी ट्रेल’ और काठमांडू का पुराना दौर
Nepal एक समय था जब 1960 और 1970 के दशक में नेपाल की राजधानी काठमांडू का फ्रीक स्ट्रीट इलाका वैश्विक पर्यटकों और ‘हिप्पी’ संस्कृति का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। उस दौर में सरकारी लाइसेंस के तहत चलने वाली दुकानों पर गांजा और हशीश आसानी से बिकते थे। बाद के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय दबाव, विशेष रूप से अमेरिकी नीतियों के प्रभाव के चलते नेपाल सरकार ने इन दुकानों को बंद कर दिया था। अब एक बार फिर सीमित दायरे में ही सही, लेकिन गांजे की कानूनी वापसी की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

