रिपोर्टर: अरविन्द सिंह
MP Health department : मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर पर होने वाली वित्तीय गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने जिलों में तैनात मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) से दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी के अधिकार वापस ले लिए हैं। अब दवाओं की खरीदी का पूरा काम राज्य स्तर से होगा और निजी एजेंसी के माध्यम से सीधे जिला व ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों तक आपूर्ति की जाएगी।
स्टेट हेल्थ कॉरपोरेशन संभालेगा कमान, गुजरात की कंपनी बनाएगी 10 वेयरहाउस
MP Health department नई व्यवस्था के तहत दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी का पूरा जिम्मा अब स्टेट हेल्थ कॉरपोरेशन को सौंप दिया गया है। कॉरपोरेशन की निगरानी में पूरे प्रदेश में दवा सप्लाई का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने दिल्ली से संचालित होने वाली गुजरात की एक प्रतिष्ठित निजी एजेंसी के साथ करार किया है, जो देश भर में ‘जन औषधि केंद्रों’ के संचालन और दवा प्रबंधन का अनुभव रखती है। यह कंपनी राज्य के 10 प्रमुख शहरों में आधुनिक वेयरहाउस (भंडारण केंद्र) का निर्माण करेगी।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित 10 शहरों में बनेंगे आधुनिक डिपो
MP Health department कंपनी ने वेयरहाउस निर्माण के लिए प्रदेश भर में सर्वे शुरू कर दिया है। बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी के आधार पर प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अलावा छह अन्य रणनीतिक शहरों का चयन किया जा रहा है। इन वेयरहाउसों में दवाओं का बड़ा स्टॉक रखा जाएगा, जहां से आसपास के जिलों के अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) तक दवाओं को सीधे पहुंचाया जाएगा।
CMHO का काम अब सिर्फ डिमांड भेजना होगा, खरीदी पर पूर्ण विराम
MP Health department पुरानी व्यवस्था में जिला स्तर पर CMHO के पास दवाएं और उपकरण खरीदने के असीमित अधिकार थे, जिसके कारण कई जिलों में अनियमितता और फर्जीवाड़े के मामले सामने आते रहते थे। नई नीति लागू होने के बाद CMHO का काम केवल ब्लॉक स्तर से दवाओं की सूची (डिमांड) एकत्र कर स्टेट हेल्थ कॉरपोरेशन को भेजना होगा। कॉरपोरेशन यह मांग वेयरहाउस एजेंसी को भेजेगा और एजेंसी निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित अस्पतालों तक सीधे सप्लाई पहुंचा देगी।

