रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul Child Marriage : बिहार के सुपौल जिले की बसबिट्टी पंचायत ने सामाजिक बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत आयोजित एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मिलकर अपनी पंचायत को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त बनाने का दृढ़ संकल्प लिया। बिहार सरकार भवन में आयोजित इस ‘बाल विवाह उन्मुखीकरण सह सखी वार्ता’ कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय मुखिया नीलम देवी ने की, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, किशोरियों और पुरुषों ने भाग लिया।
Supaul Child Marriage कानून का उल्लंघन और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
जिला हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन के जिला मिशन समन्वयक हरिनारायण कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों के मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 का हवाला देते हुए याद दिलाया कि विवाह के लिए कानूनन लड़की की उम्र कम से कम 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होनी चाहिए। समय से पहले शादी न सिर्फ एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह बेटियों की शिक्षा को रोक देता है, जिससे मातृ-शिशु मृत्यु दर और कुपोषण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं।
Supaul Child Marriage लैंगिक समानता और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर
लैंगिक विशेषज्ञ नीतू कुमारी और सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक कुमारी प्रतिभा ने समाज में बेटियों को समान अवसर देने की वकालत की। उन्होंने बताया कि कम उम्र में शादी होने से लड़कियां घरेलू जिम्मेदारियों में उलझ जाती हैं, जिससे उनके रोजगार के अवसर खत्म हो जाते हैं। आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर रहने के कारण वे अक्सर घरेलू हिंसा और शोषण का शिकार बनती हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जब तक बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक समाज की सोच में बदलाव संभव नहीं है।
Supaul Child Marriage महिला सशक्तिकरण की योजनाओं और सामूहिक शपथ से बढ़ी ताकत
कार्यक्रम के दौरान लैंगिक विशेषज्ञ मोहम्मद तारीक सिद्धकी ने महिलाओं की सुरक्षा और विकास के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं (जैसे- सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना) की जानकारी दी। महिला पर्यवेक्षिका रंजना कुमारी और उपमुखिया ने भी आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं से हर वार्ड में पैनी नजर रखने की अपील की। कार्यक्रम के समापन पर मुखिया नीलम देवी ने सभी उपस्थित ग्रामीणों को बाल विवाह रोकने की सामूहिक शपथ दिलाई और पंचायत को एक आदर्श, कुरीति-मुक्त क्षेत्र बनाने का वादा किया।

