रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Dhar : मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी धार को एक बड़ी सांस्कृतिक सौगात मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने धार में भव्य ‘मां सरस्वती लोक’ के निर्माण और ‘राजा भोज शोध संस्थान’ की स्थापना करने का एक बड़ा निर्णय लिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मालवा क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, ज्ञान परंपरा और राजा भोज के योगदान को वैश्विक पटल पर लाना है।
Dhar ज्ञान और कला के केंद्र के रूप में विकास
प्रस्तावित ‘मां सरस्वती लोक’ को ज्ञान, कला और साहित्य के एक भव्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, धार नगरी राजा भोज के काल में शिक्षा और संस्कृति का एक बहुत बड़ा केंद्र हुआ करती थी। इस नए परिसर में वास्तुकला और कलाकृतियों के माध्यम से मां सरस्वती की महिमा और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को जीवंत किया जाएगा, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेगा।
Dhar राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट से बढ़ेगा शोध का दायरा
परियोजना के तहत बनने वाला ‘राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (शोध संस्थान) देश-दुनिया के इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
- प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन: इस संस्थान में राजा भोज के शासनकाल, उनकी वैज्ञानिक सोच, वास्तुकला के सिद्धांतों और उनके द्वारा रचित ग्रंथों पर गहन अध्ययन और रिसर्च की जाएगी।
- पांडुलिपियों का संरक्षण: इसके साथ ही, मालवा के इतिहास से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप से संरक्षित करने की योजना भी बनाई गई है।
Dhar सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय प्रशासन और संस्कृति विभाग के अनुसार, इस भव्य कॉरिडोर और शोध संस्थान के निर्माण से धार जिले में सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism) को एक नई गति मिलेगी। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और महाराजा भोज के दूरदर्शी कार्यों को करीब से समझने का मौका भी मिलेगा। सरकार इस परियोजना को समय सीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी में जुट गई है।

