रिपोर्टर: सन्तोष सरावगी
Dabra : ग्वालियर के बिल्डर हरिशंकर गोयल और ‘यश विहार गृह निर्माण साख सहकारी समिति संस्था’ द्वारा डबरा में किए जा रहे एक बहुत बड़े जमीन फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस पूरे खेल में न केवल सहकारिता नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं, बल्कि नगर पालिका, नजूल और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) के कानूनों को भी सरेआम ठेंगा दिखाया गया है। शहर के बीचों-बीच स्थित करोड़ों रुपये की कृषि भूमि पर बिना किसी सरकारी अनुमति के धड़ल्ले से प्लॉट काटकर मकान खड़े किए जा रहे हैं।
Dabra न परमिशन, न डायवर्शन: कृषि भूमि पर चल रहा अवैध निर्माण
संवाददाता को मिले पुख्ता इनपुट्स और दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरी कॉलोनी के निर्माण में वैधानिक नियमों का घोर उल्लंघन किया गया है:
- नजूल और नपा में नामांतरण गायब: इस विवादित जमीन का न तो नजूल विभाग में और न ही नगर पालिका में कोई वैध नामांतरण (Mutation) हुआ है।
- कृषि भूमि पर प्लॉटिंग: सरकारी खसरे में यह जमीन आज भी ‘कृषि भूमि’ के रूप में दर्ज है। इसका नियम अनुसार आवासी उपयोग के लिए कोई डायवर्शन (व्यपवर्तन) नहीं कराया गया है।
- TNCP और नगर पालिका से कोई अनुमति नहीं: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) और स्थानीय नगर पालिका से कॉलोनी काटने के लिए कोई वैध परमिशन या ले-आउट पास नहीं कराया गया है। बिना अनुमति के व्यावसायिक रूप से कॉलोनी काटना एक गंभीर दंडनीय अपराध है।

Dabra 2003 के रिकॉर्ड पर बड़ा सवाल: समिति की जमीन दूसरे को कैसे बेची?
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि वर्ष 2003 के रिकॉर्ड के मुताबिक यह भूमि ‘यश विहार गृह निर्माण समिति’ के नाम पर दर्ज थी। नियमतः यह जमीन समिति द्वारा केवल कृषि या अपने सदस्यों के कल्याण के लिए ली गई थी।

अब सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह उठता है कि जब यह जमीन समिति की थी, तो इसे किसी अन्य बाहरी व्यक्ति या गैर-सदस्यों को व्यावसायिक रूप से कैसे विक्रय किया जा सकता है? इस पूरी प्रक्रिया का कोई भी प्रस्ताव या खाका नगर पालिका या सहकारिता विभाग को नहीं भेजा गया, जो एक बड़े वित्तीय और भू-घोटाले की ओर इशारा करता है।
Dabra कार्यक्षेत्र और सदस्यता नियमों का खुला उल्लंघन
- ग्वालियर की समिति, डबरा में धंधा: यश विहार समिति (रजिस्ट्रेशन नं. डीआर/जी डब्लूआर/84/3/11/19980) का पंजीकृत कार्यक्षेत्र केवल ग्वालियर है। म.प्र. राज्य सहकारी आवास संघ के नियमों के अनुसार, समिति अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर जमीन नहीं बेच सकती।
- गैर-सदस्यों को आवंटन: सहकारी नियमों के तहत भूखंड केवल समिति के पात्र सदस्यों को ही दिए जा सकते हैं। लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर बाहरी लोगों को बाजार भाव पर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।

Dabra ⚠️ खरीदार सावधान: इन 5 प्रमुख बिंदुओं को जरूर जांचें
डबरा के इस क्षेत्र में प्लॉट या मकान खरीदने वाले आम लोग बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। पैसा लगाने से पहले इन आवश्यक स्वीकृतियों (Permissions) की जांच जरूर कर लें:
- डायवर्शन सर्टिफिकेट: क्या कृषि भूमि को आवासी (Residential) घोषित किया गया है?
- TNCP अनुमति: क्या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से स्वीकृत मानचित्र (Map) और परमिशन है?
- नगर पालिका रेकॉर्ड: क्या नगर पालिका की कॉलोनी सेल में यह वैध रूप से दर्ज है और नामांतरण हुआ है?
- समिति का कार्यक्षेत्र: क्या बेचने वाली समिति डबरा के लिए अधिकृत है?
- खसरा नंबर की स्थिति: वर्ष 2003 से लेकर अब तक के खसरे (P-II) की नकल निकालकर मालिकाना हक की जांच करें।
Dabra जांच की आंच और सख्त कार्रवाई की मांग
हाल ही में कलेक्टर द्वारा भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ दिए गए सख्त निर्देशों के बाद, अब इस मामले को लेकर जिला सहकारिता विभाग, नजूल और नगर पालिका प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। यदि जांच में यह फर्जीवाड़ा पूरी तरह स्थापित होता है, तो न केवल इस अवैध कॉलोनी के निर्माण ढहाए जाएंगे, बल्कि अवैध रूप से कराई गई रजिस्ट्रियां निरस्त होंगी और बिल्डर व समिति के पदाधिकारियों पर एफआईआर (FIR) होना तय है।
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