रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले से प्रशासनिक शुचिता और ईमानदारी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने फर्जीवाड़े के खिलाफ एक बड़ी नजीर पेश करते हुए सरकारी सेवा में सेंध लगाने वाले दो अधिकारियों पर कड़ा शिकंजा कसा है। जामताड़ा के उपायुक्त (डीसी) के कड़े और सीधे आदेश के बाद नाला और जामताड़ा प्रखंड में कार्यरत दो ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर (बीपीओ) को तत्काल प्रभाव से उनकी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।
Jamtara संदेह के घेरे में शैक्षणिक प्रमाण पत्र और उच्च स्तरीय जांच
मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित विभाग को इन दोनों ब्लॉक प्रोग्राम अफसरों की शैक्षणिक योग्यताओं और उनके द्वारा जमा किए गए डिग्री सर्टिफिकेट्स पर काफी समय से संदेह था। इस मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने दोनों अधिकारियों के प्रमाणपत्रों की बारीकी से स्क्रूटनी की और संबंधित शिक्षण संस्थानों तथा बोर्डों से उनका भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उसने विभाग के संदेह को पूरी तरह सच साबित कर दिया।
Jamtara जांच समिति की रिपोर्ट में जालसाजी का पर्दाफाश
विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत रिपोर्ट में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि इन दोनों अधिकारियों ने ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर जैसे जिम्मेदार पद को हासिल करने के लिए पूरी तरह से जाली, फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेजों का सहारा लिया था। उनके द्वारा जमा किए गए अंकपत्र (मार्क्सशीट) और डिग्रियां कानून की नजर में पूरी तरह अवैध पाई गईं। जांच कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी, जिसके बाद प्रशासन ने बिना कोई समय गंवाए कड़ा रुख अख्तियार किया और दोनों जालसाज अधिकारियों को पदमुक्त करने का आधिकारिक फरमान जारी कर दिया।
Jamtara प्रशासनिक महकमे में खलबली और कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के अन्य विभागों में भी हड़कंप का माहौल है। जामताड़ा जिला प्रशासन ने इस मामले पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि शासकीय सेवाओं, नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, जालसाजी या भ्रष्टाचार को रत्ती भर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केवल नौकरी से बर्खास्तगी ही इस मामले का अंत नहीं है; प्रशासन ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर आगे की दंडात्मक कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।
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