BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी को दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भारतीय नागरिकता से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस और राज्य सरकार को भी नोटिस भेजा है।
यह रिवीजन पिटीशन अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नारंग ने कोर्ट में दलील दी कि उपलब्ध दस्तावेज़ों से यह संकेत मिलता है कि सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले उनके नाम को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हो सकती हैं।
सुनवाई के बाद सेशंस जज विशाल गोगने ने सोनिया गांधी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच के लिए ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड मंगवाने के आदेश भी दिए हैं।
पहले क्यों खारिज हुई थी याचिका?
इस मामले में इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। अब उसी आदेश को चुनौती देते हुए रिवीजन पिटीशन दायर की गई है।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया था।
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब उनका नाम 1980 में मतदाता सूची में किस आधार पर शामिल किया गया। इसके लिए कौन से दस्तावेज़ प्रस्तुत किए गए और क्या इसमें किसी प्रकार की गलत जानकारी या जालसाजी का सहारा लिया गया, इस पर जांच की मांग की गई है।
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है। कोर्ट उस दिन ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड की समीक्षा कर आगे का निर्णय लेगा।
