union centenary: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आमखुट मंडल के कट्ठीवाड़ा खंड में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और ग्रामीणजन शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य समाज में एकता, संगठन और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना रहा।
union centenary: दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ
सम्मेलन की शुरुआत अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ किया गया। आयोजन स्थल पर राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का माहौल देखने को मिला।
union centenary: प्रमुख संत और वक्ता रहे मौजूद
मंच पर पूज्य संत घनश्यामदासजी महाराज (महंत, पंचमुखी हनुमान मंदिर, आलीराजपुर), दीपिका कनेश दीदी तथा मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने समाज में एकता और मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार रखे।
union centenary: संघ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है: अनिल ओक
मुख्य वक्ता अनिल ओक ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इस अवसर पर देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक परतंत्र रहा, जिसका एक बड़ा कारण समाज में आपसी भेदभाव, जातिवाद और विघटन था। इन परिस्थितियों को देखते हुए डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने युवाओं के साथ मिलकर संघ की स्थापना की, जो आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में खड़ा है।
आज गर्व से स्वयं को हिंदू कहता है समाज
अनिल ओक ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब लोग स्वयं को हिंदू कहलाने में संकोच करते थे, लेकिन आज वही समाज आत्मविश्वास और गर्व के साथ अपनी पहचान स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि कठिन साधना, त्याग और सेवा भावना के कारण आज हिंदू समाज संगठित हुआ है। वर्तमान में देशभर में 80 हजार से अधिक संघ शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
आपदाओं में सबसे आगे रहते हैं स्वयंसेवक
मुख्य वक्ता ने कहा कि चाहे प्राकृतिक आपदा हो या मानव निर्मित संकट, संघ के स्वयंसेवक हमेशा सबसे पहले सेवा कार्यों में जुट जाते हैं। यही सेवा भाव संघ की पहचान और उसकी शक्ति का आधार है।
जनजातीय समाज और भगवान श्रीराम से प्रेरणा
जनजातीय समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए अनिल ओक ने कहा कि यह क्षेत्र स्वाभिमानी जनजातीय समाज का रहा है, जिसने हमेशा राष्ट्र और समाज के हित में योगदान दिया है।
उन्होंने रामायण काल का उदाहरण देते हुए कहा कि वनवासी समाज ने भगवान श्रीराम के साथ रहकर धर्मयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भगवान श्रीराम का त्याग, मर्यादा और वनवासी जीवन आज भी समाज को प्रेरणा देता है।
मतांतरण और विदेशी शक्तियों को लेकर चेतावनी
अनिल ओक ने कहा कि आज भी सेवा के नाम पर जनजातीय समाज को प्रलोभन देकर मतांतरण का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपने मूल और सांस्कृतिक पहचान को न भूलने का आग्रह किया।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी शक्तियां आज भी ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाकर देश को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं।
हिंदुओं को परिवार की तरह संगठित रहना होगा
मुख्य वक्ता ने कहा कि हमें यह आत्मचिंतन करना होगा कि हम पहले क्या थे, आज क्या हैं और भविष्य में हमें क्या बनना है।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत विश्व गुरु था और पूरी दुनिया को ज्ञान का मार्ग दिखाता था। लेकिन आपसी बिखराव और आत्मकेंद्रित सोच के कारण हम कमजोर हुए। अब समय आ गया है कि हिंदू समाज परिवार की तरह संगठित होकर एक-दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना को फिर से जीवित करे।
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